राजनांदगांव. आम के पेड़ों में मंजर अब टिकोले बन गए हैं और आम में टिकोले लगना शुरू हो गए हैं. टिकोले लगने के बाद कई बार यह झड़ जाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान होता है. कई दवाओं का छिड़काव करने से इन्हें बचाया जा सकता है, इसलिए इसका ख्याल रखना जरूरी है. कई बार बिना तेज आंधी के भी टिकोले अपने आप झड़ने लगते हैं. इसका एक कारण हार्मोनल इंबैलेंस भी होता है. आम के पेड़ में हार्मोनल असंतुलन के कारण भी टिकोले झड़ने लगते हैं.
हार्मोनल इंबैलेंस के कारण भी झड़ते हैं आम के टिकोले
यदि इसके बचाव के लिए उपयुक्त दवाई की जानकारी और उसके छिड़काव का तरीका किसानों को पता हो तो टिकोले को झड़ने से रोका जा सकता है और आम की पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है. कृषि विभाग के सहायक संचालक डॉक्टर बीरेंद्र अनंत ने बताया कि हार्मोनल इंबैलेंस के कारण भी आम के टिकोले झड़ने लगते हैं. ऐसी स्थिति में दवाओं का छिड़काव आवश्यक हो जाता है. अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड का छिड़काव कर आम के टिकोले को झड़ने से रोका जा सकता है. लेकिन जरूरी यह है कि किसानों को इस दवाई की मात्रा और छिड़काव का सही तरीका पता होना चाहिए.
इन दवाओं का करें छिड़काव
अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड का 1 एमएल 5 लीटर पानी में मिलाकर आम के पौधों पर छिड़काव करना चाहिए. यह दवाई का छिड़काव शाम में हो तो सबसे बेहतर होगा, क्योंकि शाम में छिड़काव करने से इसका प्रभाव अधिक देर तक आम के पौधों पर रहेगा. वहीं, जब सुबह छिड़काव करते हैं, तो दिन की धूप में इसका असर समाप्त हो जाता है.
बेवजह ना छिड़कें दवाई, विशेषज्ञ से लें सलाह
वैज्ञानिक बताते हैं कि अगर आम के टिकोले सुरक्षित हैं तो इन दवाओं का छिड़काव ना करें, क्योंकि इस दवा का बेवजह छिड़काव घातक भी हो सकता है. अगर बड़ी मात्रा में आम के टिकोले झड़ने लगे तो ही इस दवा का छिड़काव किया जाए. इससे पहले किसी भी विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है.