January 29, 2026
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Gwalior News: मंदिर की जमीन पर माफिया की नजर, अब होगा एक्शन

  • April 15, 2025
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ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मंदिरों और सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर रखा है. अकेले ग्वालियर जिले के 20 से ज्यादा मंदिरों की हजारों बीघा

Gwalior News: मंदिर की जमीन पर माफिया की नजर, अब होगा एक्शन

ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मंदिरों और सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर रखा है. अकेले ग्वालियर जिले के 20 से ज्यादा मंदिरों की हजारों बीघा जमीन माफिया ने खुर्दबुर्द कर बेच दिया है या फिर कब्जा कर लिया गया है. ये सारा खेल, भूमाफिया, राजस्व कर्मचारी-अधिकारी की मिली भगत से हो रहा है. इसको लेकर हाईकोर्ट तक ने अफसरों को फटकार लगाई, तो वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर ग्वालियर में एक्शन शुरू हुआ है. ग्वालियर में प्रशासन ने मंदिरों की जमीन चिन्हित कर कब्जा हटाना शुरू कर दिया है.

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ग्वालियर में मंदिरों की अधिकांश जमीन पर भू माफियाओं का कब्जा हो गया है. आजादी के बाद जिले के 865 मंदिरों को 4290 हेक्टेयर भूमि दी गई थी,. माफियाओं से सांठगांठ से राजस्व विभाग के पटवारियों और अफसरों ने मंदिरों के खसरों में बदलाव किए. 1960 से 70 के दशक जमीनें मंदिरों के नाम थीं, बाद में वो जमीन निजी दर्ज हो गईं.

आइए आपको दिखाते हैं अकेले ग्वालियर जिले में मंदिरों की सरकारी जमीन का क्या हाल है

जिले में मंदिर और उनके नाम कितनी जमीनें

ग्वालियर तहसील
183 राजस्व ग्रामों में 352 धर्म स्थल हैं. इनके नाम 1091.79 हेक्टेयर भूमि है. यहां मंदिरों की काफी जमीन खुर्दबुर्द हो गई है.

डबरा तहसील
123 राजस्व ग्रामों में 285 धर्म स्थल हैं. इनके नाम 2122.47 हेक्टेयर जमीन है. इस तहसील के गांवों में मंदिरों की जमीन को खुर्दबुर्द करने के मामले सामने आ चुके हैं.

भितरवार तहसील
117 राजस्व ग्रामों में 228 धर्मस्थलों के नाम 1076.65 हेक्टेयर जमीन है. भितरवार में मंदिरों के नाम बड़े रकवे मौजूद हैं. यहां भी जमीनें खुर्दबुर्द हुई हैं.

आइए एक नजर ग्वालियर जिले के उन मंदिरों पर डालते है जिनकी जमीन पर कब्जा हो गया है

  •  गंगादास की बड़ी शाला के नाम पर 85 बीघा जमीन है.
  • शिंदे की छावनी स्थित महादेव ट्रस्ट की अलग-अलग पटवारी हलकों में 120 बीघा जमीन दर्ज है
    अम्मा जी महाराज निंबालकर की गोठ के पास लगभग 50 बीघा जमीन है
  • गजराराजा चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम शहर में लगभग 73 बीघा जमीन है
  • रामजानकी मंदिर छोटी शाला के नाम पर शहर और आसपास के गांवों में 100 बीघा से ज्यादा जमीन है
  • नरसिंह मंदिर बेहट के नाम पर लगभग 187 बीघा जमीन है
  • इन जमीनों में से अधिकांश जमीन भूमाफियाओं के नाम रिकार्ड में दर्ज़ चुकी है

इन मंदिरों की जमीनों को बचाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट से लेकर मंदिरों के पुजारी और ट्रस्टी भी मैदान में है. लेकिन लंबी शिकायतों के बावजूद भी मंदिरों की जमीनों को मुक्त नहीं कराया जा सका है. कानून के जानकारों कहना है कि अफसरों ने कोर्ट में मंदिरों और सरकार की जमीन के केस कमजोर कर दिए, जिससे केस कब्जाधारियों के पक्ष में चले गए, और जमीन निजी घोषित होने लगीं. अधिवक्ता संकेत साहू के मुताबिक रामजानकी मन्दिर की जमीन को लेकर उन्होंने शिकायत की जिस पर अब कार्रवाई हो रही है.

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धार्मिक, सामाजिक ट्रस्ट, माफी-औकाफ की ग्वालियर शहरों में मौजूद अधिकतर जमीनों को खुर्दबुर्द किया जा चुका है. ट्रस्ट, सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और भू माफिया के गठजोड़ ने धर्मस्थलों की जमीनों पर कॉलोनियां बसा दी हैं, जबकि पुरानी धर्मशालाओं के स्वरूप को नियम के खिलाफ खत्म करके या तो होटल बन गए हैं या अन्य व्यावसायिक कामों में उपयोग किया जा रहा है. कलेक्टर रूचिका चौहान का कहना है कि हमने मंदिरों और सरकार की जमीन सर्वे करवा लिया है. मंदिरों और सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने भी शुरू कर दिए हैं. ये कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.

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