Devendra Fadnavish Vs Eknath Shinde: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच तकरार कोई नहीं बात नहीं है. फडणवीस के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे के कार्यकाल में शुरू की गई शेतकरी भवन योजना को रद्द कर दिया है. इस फैसले ने न केवल किसानों के बीच नाराजगी पैदा की है, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन में भी मतभेदों को उजागर किया है. शिंदे के कार्यकाल के कई फैसलों को फडणवीस सरकार रद्द कर रही है या फिर समीक्षा के नाम पर उसे रोक रही है.
शेतकरी भवन योजना एकनाथ शिंदे की सरकार ने राज्य के किसानों के लिए शुरू की थी. इसका उद्देश्य था राज्य की 116 कृषि उपज मंडी समितियों में किसानों को सस्ते में भोजन और ठहरने की सुविधा देना. इस योजना के तहत गढ़चिरौली, बीड, जालना, कोल्हापुर, नांदेड़ और अमरावती जैसे छह जिलों में शेतकरी भवनों का निर्माण शुरू किया गया था. प्रत्येक भवन की लागत करीब 1.52 करोड़ रुपये अनुमानित थी, जिसमें 50-70% हिस्सा सरकार और बाकी स्थानीय बाजार समिति को देना था.
क्या थी योजना
योजना के तहत इन भवनों में भूतल पर एक बहुउद्देश्यीय हॉल और तीन दुकानें बनाई जानी थीं, जबकि पहली मंजिल पर चार कमरे और 20 बिस्तरों की व्यवस्था होनी थी. इसका एक मॉडल भी तैयार किया गया था, जो किसानों को मंडी में आने पर घर जैसी सुविधा देने का वादा था. लेकिन अब फडणवीस सरकार ने इन भवनों के लिए दी गई प्रशासनिक मंजूरी वापस ले ली है. इससे योजना अधर में लटकती दिख रही है.
इस फैसले ने कई सवाल खड़े किए हैं. एकनाथ शिंदे ने जब यह योजना शुरू की थी, तब इसे किसानों के हित में एक बड़ा कदम बताया गया था. लेकिन पिछले चार महीनों में फडणवीस सरकार ने शिंदे के कई फैसलों को या तो रद्द किया है या उनकी समीक्षा शुरू की है. शेतकरी भवन योजना का रद्द होना उनमें से एक है. इस कदम से किसानों को होने वाली असुविधा के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में तनाव भी बढ़ गया है.
एक्स पर इस मुद्दे को लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ यूजर्स ने फडणवीस सरकार के इस फैसले की आलोचना की और इसे किसान विरोधी करार दिया. एक यूजर ने लिखा कि किसानों के लिए भवन बनाने की योजना को रद्द करना शर्मनाक है. यह सरकार किसानों की सुविधा क्यों नहीं चाहती. वहीं, कुछ ने इसे शिंदे और फडणवीस के बीच सियासी खींचतान का नतीजा बताया. दूसरी ओर, सरकार समर्थकों का कहना है कि यह फैसला वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए लिया गया है.