Assam Flood: गोद में बकरी-बछड़ा… सब कुछ तबाह, मगर हिम्मत ने नहीं टेके घुटने
- June 2, 2025
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Assam Flood: असम के एक गांव में एक दिन पहले रविवार को सूरज की पहली किरण के पहुंचने से पहले इलाके में तबाही ने दस्तक दे दी. पानी
Assam Flood: असम के एक गांव में एक दिन पहले रविवार को सूरज की पहली किरण के पहुंचने से पहले इलाके में तबाही ने दस्तक दे दी. पानी
Assam Flood: असम के एक गांव में एक दिन पहले रविवार को सूरज की पहली किरण के पहुंचने से पहले इलाके में तबाही ने दस्तक दे दी. पानी की उफनती लहरें हर तरफ फैल चुकी थीं. मानसून के दस्तक के साथ भारी बारिश ने पूरे इलाके को समंदर बना दिया. चारों तरफ पानी ही पानी था. घर डूब गए. खेत में लगी फसलें बर्बाद हो गईं. जानवरों की जान पर बन आई. इंसान अपनी जिंदगी बचाने के लिए प्रकृति की माया के साथ उलझते दिखा. गांव के लोग छोटी-छोटी नावों और बांस के सहारे अपनी जान बचाने की कोशिश करते रहे.
ये हाल है असम के नागौन जिले का. दरअसल, इस साल पूरे देश में मौसम का चक्र बिगड़ा हुआ है. उत्तर भारत में इस वक्त अच्छी बारिश हो रही है, जबकि आमतौर पर ये समय इंसान को झुलसाने वाली गर्मी का होता है. देश के कई इलाकों में समय से पहले मानसून ने भी दस्तक दे दी है. इससे वहां भारी बारिश हो रही है. यह तस्वीरें असम की हैं. यहां भारी बारिश की वजह से भीषण बाढ़ आई है. इलाके की नदियां उफान पर हैं और लोग बेघर हो रहे हैं.
यह तस्वीर नागौन जिले के कामपुर ही है. यहां भारी बारिश ने भीषण तबाही मचाई है. एक शख्स अपनी बकरी को सीने से लगाकर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं. तस्वीर से पता चलता है कि पानी उनकी कमर तक आ चुका था. उनकी आंखों में एक तरह का डर दिख रहा है. लेकिन, वह हिम्मत नहीं हार रहे. ये बकरी उनकी जिंदगी का सहारा है. दूध बेचकर वो अपने परिवार का पेट पालते हैं. अगर बकरी डूब गई तो उनके परिवार का क्या होगा. पानी की तेज धार में वो बार-बार फिसल रहे थे, लेकिन बकरी को कसकर पकड़े रहे. पीछे से उनके परिवार वाले जल्दी नाव पर आने कह रहे हैं लेकिन शख्स का जवाब आता है- पहले इसे बचा लूं, ये हमारी जिंदगी है. काफी मशक्कत के बाद वे शख्स नाव तक पहुंचे, लेकिन उनकी आंखें नम थीं, घर तो डूब चुका था, साल भर की फसल भी पानी में बह गई.
दूसरी तस्वीर में तीन लोग एक छोटी नाव पर सवार हैं. नाव में एक नन्हा बछड़ा भी है, जिसे वो लोग अपनी जान से ज्यादा कीमती मानते हैं. नाव के बीच में बैठे 14 साल के लड़के की आंखों में मासूमियत और डर दोनों दिख रहे हैं. लड़के का परिवार पशुपालन पर निर्भर है, ये बछड़ा उसकी गाय का इकलौता बच्चा है. अगर ये डूब गया तो गाय दूध देना बंद कर देगी.
असम और मेघालय जैसे राज्यों में इस बार बाढ़ ने भयानक रूप ले लिया. ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, गांवों में पानी 5-6 फीट तक भर गया, लोग ऊंचे स्थानों की तलाश में भटक रहे थे, कई ने अपने घर छोड़ दिए, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र सब डूब गए. तमाम लोग अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, राहत शिविरों तक पहुंचने का रास्ता भी पानी से भरा था, सरकारी मदद देर से पहुंच रही थी, लोग अपने जानवरों और बच्चों को बचाने के लिए खुद ही जूझ रहे थे. गांव के ज्यादा घर डूब गए, कई लोग नावों पर रात बिता रहे थे, खाने-पीने की कमी हो गई.
दिन ढलने के बाद कुछ राहत कार्यकर्ता गांव पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया, लेकिन नुकसान इतना था कि उसे भरना मुश्किल था. बकरी और बछड़ा तो बच गए, लेकिन उनके घर, फसल और सपने पानी में बह गए.
