Bharat Coking Coal IPO: रेयर अर्थ और सोलर सेक्टर में निवेश, उत्पादन 15 मिलियन टन बढ़ेगा
- January 12, 2026
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नई दिल्ली: भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), जो देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी और कोल इंडिया की सहायक इकाई है, ने अपने आईपीओ के जरिए
नई दिल्ली: भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), जो देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी और कोल इंडिया की सहायक इकाई है, ने अपने आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में मजबूत एंट्री की है। 9 जनवरी को खुले 1,071 करोड़ रुपये के इस आईपीओ को कुछ ही घंटों में पूरा सब्सक्रिप्शन मिल गया, जिससे निवेशकों का भरोसा साफ झलकता है।
BCCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि कंपनी अब पारंपरिक कोयला खनन के साथ-साथ रेयर अर्थ मेटल्स और सोलर एनर्जी सेक्टर में भी कदम बढ़ा रही है। आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग इन्हीं क्षेत्रों में निवेश के लिए किया जाएगा।
अग्रवाल ने बताया कि कोल इंडिया ने मध्य प्रदेश में ग्रेफाइट ब्लॉक और आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए एक्सप्लोरेशन लाइसेंस हासिल किया है। ये परियोजनाएं इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड के सहयोग से चलाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का विकास करना है, जो इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सोलर पैनल के लिए आवश्यक हैं।

झारखंड के धनबाद जिले के झरिया कोयला क्षेत्र में स्थित BCCL के ई-ब्लॉक के पहले चरण को अगले वित्त वर्ष में शुरू किया जाएगा। इसके पूरी तरह चालू होने के बाद कंपनी का वार्षिक उत्पादन 15 मिलियन टन बढ़कर 54-55 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा।
इस ब्लॉक में 300 मिलियन टन से अधिक कोयले का भंडार मौजूद है। वहीं, कंपनी के कुल कोयला भंडार 7.9 अरब टन से ज्यादा हैं, जिससे अगले 100 वर्षों तक खनन संभव है।
पिछले वित्त वर्ष में रिकॉर्ड बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ था। औसतन 1,700 मिमी की जगह 2,200 मिमी से अधिक बारिश हुई। हालांकि अब मानसून समाप्त हो चुका है और कंपनी को भरोसा है कि चालू वित्त वर्ष में उत्पादन 40.5 मिलियन टन से अधिक रहेगा।
कंपनी ने बताया कि कोकिंग कोल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, खासकर ऑस्ट्रेलिया की दरों से जुड़ी होती हैं। घरेलू बाजार में बिजली और सीमेंट कंपनियों को सरकारी दरों पर ही कोयला उपलब्ध कराया जाता है।
मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि स्टील उद्योग में कोकिंग कोल आधारित ब्लास्ट फर्नेस की मांग लंबे समय तक बनी रहेगी, क्योंकि इलेक्ट्रिक फर्नेस के लिए पर्याप्त स्क्रैप स्टील देश में उपलब्ध नहीं है।
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