Loose Motion Home Remedies: बारिश का मौसम आते ही कई तरह की बीमारियां बढ़ने लगती हैं और इनमें से सबसे आम है दस्त यानी डायरिया. यह एक पाचन संबंधी समस्या है, जिसमें मरीज को बार-बार पानी जैसे ढीले मल त्याग की परेशानी होती है. कई बार यह समस्या कुछ घंटों या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है (Loose Motion Home Remedies), लेकिन समय पर ध्यान न देने पर शरीर को कमजोर कर सकती है. ऐसे में घरेलू उपाय और सही खान-पान काफी मददगार साबित होते हैं. इस बारे में लोकल 18 ने डॉक्टर रिद्धि पांडे से बातचीत की और दस्त के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों पर जानकारी ली. आइए डिटेल से जानते हैं.
मानसून में बढ़ जाती है दस्त की परेशानी
डॉ. रिद्धि पांडे ने बताया कि मानसून के समय दस्त के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. इस मौसम में लोग तले-भुने खाने जैसे पकौड़े, समोसे, ब्रेड पकौड़ा आदि का अधिक सेवन करने लगते हैं. सीमित मात्रा में ये चीजें नुकसान नहीं करतीं, लेकिन बार-बार खाने से पेट खराब हो सकता है. तली-भुनी चीजें लीवर पर बुरा असर डालती हैं और उसका कामकाज बिगाड़ देती हैं. इससे खाना पचने में दिक्कत होती है, लीवर बढ़ सकता है और कई बार अल्ट्रासाउंड कराना भी जरूरी हो जाता है. लीवर की खराबी से कोलेस्ट्रॉल तक बढ़ सकता है और समस्या छाती में दर्द तक पहुंच सकती है.
खान-पान में बरतें सावधानी
डॉ. पांडे के मुताबिक दस्त होने पर सबसे जरूरी है कि खान-पान सादा रखा जाए. तली हुई चीजें, रिफाइंड तेल में बना भोजन और मसालेदार खाना बिल्कुल नहीं लेना चाहिए. सरसों के तेल में हल्का भोजन पकाना बेहतर है. पूड़ी-पराठे से भी दूरी बनानी चाहिए. दस्त में दही और ईसबगोल की भूसी का इस्तेमाल एक कारगर घरेलू उपाय है. दही में एक चम्मच ईसबगोल मिलाकर दिन में एक बार खाना फायदेमंद होता है. अगर आराम न मिले तो इसे दिन में दो बार भी लिया जा सकता है.
पुदीने से भी मिलता है फायदा
डॉ. पांडे ने कहा कि बाजार में मिलने वाली पुदीने की गोलियों के बजाय ताजे पुदीने की पत्तियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं. इन्हें सीमित मात्रा में लेने से पेट को ठंडक मिलती है और दस्त जैसी दिक्कतों से बचाव होता है.
डॉक्टर ने सलाह दी कि दस्त से बचाव के लिए खान-पान पर संयम और स्वच्छता बहुत जरूरी है. अगर घरेलू उपाय अपनाए जाएं तो न केवल दस्त से राहत मिलती है, बल्कि पाचन तंत्र भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है.