February 20, 2026
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जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश को बनाया गया बच्चा, कमंडल रखते ही फूट पड़ी नदी

  • June 8, 2025
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Last Updated:June 07, 2025, 23:59 IST Chitrakoot news in hindi : यूपी-एमपी की सीमा पर बसे चित्रकूट के गहरे जंगलों में एक ऐसा आध्यात्मिक रत्न छिपा है, जिसकी

जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश को बनाया गया बच्चा, कमंडल रखते ही फूट पड़ी नदी

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Chitrakoot news in hindi : यूपी-एमपी की सीमा पर बसे चित्रकूट के गहरे जंगलों में एक ऐसा आध्यात्मिक रत्न छिपा है, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है. यहां दूर-दूर से लोग इस चमत्कार को देखने पहुंचते हैं.

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मंदिर

मंदिर की फोटो

चित्रकूट. यूपी-एमपी की सीमा पर बसे चित्रकूट के गहरे जंगलों में एक ऐसा आध्यात्मिक रत्न छिपा हुआ है, जिसे लोग सती अनसूईया मंदिर के नाम से जानते हैं. यह स्थान न सिर्फ धार्मिक बल्कि पौराणिक दृष्टि से भी बेहद खास है. दूर-दूर लोग यहां पहुंचते हैं. भगवान राम की तपोभूमि माने जाने वाले चित्रकूट में यह मंदिर श्रद्धा, तप और मातृत्व की अद्भुत मिसाल है. यही वो स्थान है जहां महर्षि अत्रि की पतिव्रता पत्नी माता अनुसूया ने अपने तप के प्रभाव से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं को बालक बना दिया था.

इस मंदिर के महंत कमलेश्वर नंद Local 18 से बताते हैं कि जब ब्रह्मा जी को अपना साम्राज्य आगे बढ़ना हुआ, तब उन्होंने अपने चार पुत्रों को बुला कर बोला कि आप आज्ञा का पालन करिए. उनके पुत्रों ने कहा कि वे ऐसा नहीं कर पाएंगे. उनको सिर्फ भगवान का भजन करना है. उसके बाद ब्रह्मा जी ने अत्रि ऋषि महाराज को बुलाया, महाराज बोले कि एक तरफ स्वयं का कल्याण, दूसरी तरफ पिता की आज्ञा. इस बीच, अत्रि ऋषि महाराज का माता अनुसूया से विवाह हो गया. विवाह के बाद अत्रि ऋषि इसी पर्वत में ध्यानस्त हो गए. जब कई वर्षों के बाद उनकी समाधि टूटी तो उन्होंने देखा की माता अनुसूया भी यहीं विराजमान हैं.

मंदाकिनी का उद्गम 

मंदाकिनी नदी जिसे चित्रकूट की जीवनरेखा कहा जाता है, उसका उद्गम स्थल भी यही आश्रम है. मंदिर के महंत कमलेश्वर नंद बताते हैं कि जब महर्षि अत्रि कठोर तपस्या में लीन थे, तब उनकी समाधि टूटने पर उन्होंने माता अनसूईया से जल मांगा. माता जंगल-जंगल कमंडल लेकर भटकीं, लेकिन कहीं जल नहीं मिला. तभी आकाशवाणी हुई कि जहां वे अपना कमंडल रख देंगी, वहीं जल धारा फूट पड़ेगी. माता ने वैसा ही किया और वहीं से मंदाकिनी नदी की धारा प्रवाहित हो गई.

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जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश को बनाया गया बच्चा, कमंडल रखते ही फूट पड़ी नदी

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