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मंदिर में चढ़ाएं या चाय में डालें! ये तुलसी है 'एक पंथ दो काज'

  • June 5, 2025
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Last Updated:June 05, 2025, 20:49 IST Saharanpur Latest News: सहारनपुर के ‘प्रकृति कुंज’ में मीठी तुलसी (स्टीविया) का संरक्षण और उत्पादन किया जा रहा है. यह शुगर के

मंदिर में चढ़ाएं या चाय में डालें! ये तुलसी है 'एक पंथ दो काज'

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Saharanpur Latest News: सहारनपुर के ‘प्रकृति कुंज’ में मीठी तुलसी (स्टीविया) का संरक्षण और उत्पादन किया जा रहा है. यह शुगर के मरीजों के लिए लाभकारी है. पौधे ₹50 से ₹100 में उपलब्ध हैं.

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चीनी से भी मीठी है यह मीठी तुलसी खाते ही चिपक जाते हैं होंठ

हाइलाइट्स

  • सहारनपुर में मीठी तुलसी का उत्पादन हो रहा है.
  • मीठी तुलसी शुगर के मरीजों के लिए लाभकारी है.
  • मीठी तुलसी के पौधे ₹50 से ₹100 में उपलब्ध हैं.

सहारनपुर: तुलसी जिसे हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र पौधा माना जाता है. इसे भगवान विष्णु की पत्नी मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है. घर में तुलसी का पौधा लगाने से सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. तुलसी के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से एक है ‘मीठी तुलसी’ जिसे अंग्रेज़ी में ‘स्टीविया’ (Stevia) कहा जाता है.

मीठी तुलसी जो अमेरिकी मूल की प्रजाति है, लेकिन अब इसका उपयोग भारत में भी बढ़ता जा रहा है. यह तुलसी अन्य प्रकारों से भिन्न है क्योंकि इसका स्वाद मीठा होता है और इसके औषधीय गुण भी बहुत प्रभावशाली हैं. खासकर शुगर के मरीजों के लिए यह रामबाण की तरह काम करती है.

सहारनपुर में मीठी तुलसी का संरक्षण और उत्पादन
सहारनपुर जिले के दिल्ली रोड पर स्थित चुनहेटी फाटक के पास ‘प्रकृति कुंज’ नामक स्थल पर विलुप्त होती जा रही विभिन्न प्रजातियों के पौधों को संजोया और तैयार किया जा रहा है. यहां मीठी तुलसी के पौधों को भी खास तौर पर उगाया जाता है. प्रकृति कुंज में मीठी तुलसी के पौधे ₹50 से ₹100 की कीमत पर उपलब्ध हैं. बहुत से लोग यहां से पौधे खरीदकर अपने घरों में लगाते हैं और उनकी पूजा भी करते हैं.

मीठी तुलसी की यह खासियत है कि यह पूरे साल हरी-भरी रहती है और कभी सूखती नहीं. इसका मीठा स्वाद होने के कारण शुगर के मरीज इसे चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं. तुलसी खाने के बाद जीभ पर मीठास का एहसास होता है, जो कि चीनी से भी ज्यादा मीठा लगता है.

राजेंद्र अटल और प्रकृति कुंज की सेवाएं
‘प्रकृति कुंज’ से राजेंद्र अटल ने लोकल 18 को बताया कि वे वर्षों से विलुप्त होती जा रही पेड़-पौधों की प्रजातियों को बचाने का काम कर रहे हैं. उनके यहां लगभग 12 से 14 प्रकार की तुलसी की प्रजातियां उपलब्ध हैं, जिनमें मीठी तुलसी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. मीठी तुलसी को अंग्रेजी में “Sweet Basil” या “Stevia” कहा जाता है.

राजेंद्र अटल ने बताया कि मीठी तुलसी का उत्पादन सहारनपुर में काफी समय से किया जा रहा है. शुगर के मरीज खास तौर पर इस तुलसी का उपयोग करते हैं क्योंकि यह प्राकृतिक मिठास के साथ औषधीय गुण भी प्रदान करती है.

मीठी तुलसी का स्वास्थ्य लाभ
मीठी तुलसी में प्राकृतिक मिठास होने के साथ-साथ यह कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है. शुगर के मरीजों के लिए यह चीनी के बेहतर विकल्प के रूप में जानी जाती है. नियमित तौर पर मीठी तुलसी का सेवन ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है और शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना मिठास प्रदान करता है.

सहारनपुर के प्रकृति कुंज में मीठी तुलसी का उत्पादन और संरक्षण एक सराहनीय पहल है, जो इस दुर्लभ प्रजाति को बचाने के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प भी प्रदान करती है. मीठी तुलसी के पौधे ₹50 से ₹100 के बीच उपलब्ध हैं और इसे अपने घरों में लगाने से न केवल सौंदर्य बढ़ता है बल्कि स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है.

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मंदिर में चढ़ाएं या चाय में डालें! ये तुलसी है ‘एक पंथ दो काज’

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