मॉस्को. रूस दुनिया में शीर्ष हथियार निर्यातकों में से एक बना हुआ है क्योंकि हमारे सभी हथियार वास्तविक युद्ध में अपनी उपयोगिता साबित करते हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को यह बात ऐसे समय में कही है, जबकि हाल ही में भारत ने अपने हथियारों से पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को ध्वस्त कर दिया. ऐसे में यह समझा जा रहा है कि पुतिन का ये बयान कहीं पाकिस्तान की हार की गवाही तो नहीं दे रहा.
दरअसल, भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बौखलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर और सभी सीमाई क्षेत्रों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले करने शुरू कर दिए थे, लेकिन भारत के पास मौजूद एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने उन सभी हमलों को नाकाम कर दिया है. भारत को एस-400 एयर डिफेंस रूस से ही मिला है. इतना ही नहीं, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत ने जिस ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया, वो भी भारत-रूस की पहल का ही नतीजा है.
इसीलिए पुतिन के बयान को भारत-पाकिस्तान जंग से जोड़कर देखा जा रहा है. बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष लोगों पर घातक हमला किया था, जिसमें 26 नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी. हमले के पहले आतंकियों ने धर्म पूछा फिर लोगों को मौत के घाट उतारा. मृतकों में बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे.
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद भारतीय सेना ने 7 मई को आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की. सेना की इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसमें मसूद अजहर के लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हाफिज सईद के जमात-उद-दावा के आतंकी शिविर भी शामिल थे.
वहीं, पाकिस्तानी सेना ने जवाबी हमले के प्रयास में भारत पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम्स जैसे आकाशतीर और एस-400 ने उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया. इसके बाद भारत ने कड़ा पलटवार करते हुए पाकिस्तान के 9 से 11 वायुसेना ठिकानों को तबाह कर दिया. इस सख्त सैन्य कार्रवाई से घबराई पाकिस्तानी सेना ने संघर्षविराम की अपील की. पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर तनाव समाप्त करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई.
भारत ने अपनी सैन्य कार्रवाई के प्रमाण भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत किए, जिससे यह साफ हो गया कि भारत की जवाबी कार्रवाई सिर्फ आत्मरक्षा नहीं, बल्कि आतंक के ठिकानों को जड़ से खत्म करने की निर्णायक नीति का हिस्सा थी.