15 साल तक हिजाब बैन करो…. भारत का मित्र देश उठाने जा रहा बड़ा कदम?
- May 22, 2025
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Last Updated:May 22, 2025, 00:00 IST France Hijab Ban News: फ्रांस की मैक्रों सरकार ने 15 साल से कम उम्र की लड़कियों के सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने
Last Updated:May 22, 2025, 00:00 IST France Hijab Ban News: फ्रांस की मैक्रों सरकार ने 15 साल से कम उम्र की लड़कियों के सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने
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फ्रांस की सरकार इसे लेकर सख्त रुख अपना रही है. (Representational Picture)
हाइलाइट्स
France Hijab Ban News: फ्रांस की इमैनुएल मैक्रों सरकार की पार्टी ने एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है. दरअसल, नए प्रस्ताव में कहा गया कि 15 साल से कम उम्र की लड़कियों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने पर प्रतिबंध रहेगा. यह अभी फिलहाल प्रस्ताव है, जो लागू नहीं हुआ है. राष्ट्रपति मैक्रों ने एक हाई-लेवल सरकारी बैठक की अध्यक्षता की, जिसका मकसद फ्रांस में राजनीतिक इस्लामवाद के प्रभाव की समीक्षा करना था. इसी बीच 15 साल से कम उम्र की बच्चियों के हिजाब पहनने का प्रस्ताव आया.
फ्रांस में यह बैठक उस रिपोर्ट के आधार पर बुलाई गई थी जिसे मैक्रों ने पिछले वर्ष मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रांस में मौजूदगी की जांच का आदेश दिया था. रिपोर्ट के निष्कर्षों में कहा गया है कि मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र में करीब 90 साल पहले स्थापित हुआ था, जिसे राजनीतिक इस्लाम की आधुनिक अवधारणा की शुरुआत माना जाता है. इसे फ्रांस में राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताया गया. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि इस संगठन की गतिविधियां समाज की बुनियाद और गणतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकती हैं.
मैक्रों ने अपने मंत्रियों से कहा है कि वे जून तक ऐसे प्रस्ताव तैयार करें जिनके जरिए इन खतरों का सामना किया जा सके और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखा जा सके. सत्तारूढ़ पार्टी ‘रिनेसां’ (Renaissance) के सांसदों ने सार्वजनिक रूप से सुझाव दिया है कि 15 साल से कम उम्र की लड़कियों को स्कूल के बाहर भी हिजाब पहनने की अनुमति नहीं होनी चाहिए. अभी तक फ्रांस में पब्लिक स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों व हिजाब पर प्रतिबंध है लेकिन यह प्रतिबंध सार्वजनिक स्थानों पर नहीं लागू होता है.
फ्रांस में पहले से ही सेकुलरिज्म के सिद्धांत को लेकर विवाद रहा है, जो राज्य और धर्म को अलग रखने की वकालत करता है. आलोचकों का कहना है कि यह सिद्धांत मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. मानवाधिकार संगठनों और मुस्लिम समूहों ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा है कि यह कदम व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक अभिव्यक्ति और अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन है.

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें
