पटना. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अर्धसैनिक बलों के जवानों को भारतीय सेना के समान सम्मान और सुविधाएं देने की मांग की है. तेजस्वी यादव ने CRPF, BSF, ITBP, CISF, SSB और Assam Rifles के जवानों को भी भारतीय सेना की तरह दर्जा देने की मांग की. इस पत्र में तेजस्वी ने कई मुद्दे उठाए, जैसे अर्धसैनिक बलों के शहीदों को ‘बैटल कैजुअल्टी’ का दर्जा, समान मुआवजा, सरकारी नौकरी, पेंशन और ‘वन रैंक वन पेंशन’ की सुविधा. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर में बिहार के चार जवान शहीद हुए हैं. तेजस्वी यादव बिहार चुनाव से पहले सभी जवानों के घर जाकर मृतक जवानों के परिवार से मिले हैं. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखा. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार चुनाव से ठीक पहले तेजस्वी यादव की किस वोट बैंक पर नजर है? क्या बिहार के सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को तेजस्वी यादव ने बड़ी चतुराई से साधने की कोशिश की है?
एक तरफ तेजस्वी यादव का यह पत्र देश की सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों के योगदान को रेखांकित करता है. उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल दोनों ही देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं, फिर भी शहीदों को मिलने वाले सम्मान, मुआवजे और सुविधाओं में स्पष्ट भेदभाव है. भारतीय सेना के शहीदों को जहां केंद्र और राज्य सरकारों से आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलता है, वहीं अर्धसैनिक बलों के शहीदों और उनके परिवारों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाती. तेजस्वी ने इस भेदभाव को समाप्त करने और अर्धसैनिक बलों के लिए ‘लिबरलाइज्ड पेंशन स्कीम’ लागू करने की मांग की, ताकि उनके परिवारों को भी समान सम्मान और सुरक्षा मिले.
तेजस्वी यादव ने गृह मंत्री अमित शाह को क्यों लिखा पत्र?
तेजस्वी के इस पत्र का समय और संदर्भ बिहार चुनाव 2025 से पहले विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. बिहार में अर्धसैनिक बलों के जवान बड़ी संख्या में हैं और उनके परिवार राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. तेजस्वी की यह मांग न केवल इन जवानों और उनके परिवारों की भावनाओं को संबोधित करती है, बल्कि एक व्यापक मतदाता वर्ग को प्रभावित करने की रणनीति भी प्रतीत होती है. बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और महागठबंधन की छवि को मजबूत करने के लिए तेजस्वी ने इस मुद्दे को उठाकर एक संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषय को चुना है. यह कदम उनकी पार्टी को उन मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाने का प्रयास हो सकता है, जो देशभक्ति और सैनिकों के सम्मान जैसे मुद्दों को महत्व देते हैं.
तेजस्वी यादव को पत्र लिखने से फायदा या नुकसान?
इसके अलावा, यह पत्र केंद्र की भाजपा सरकार पर दबाव बनाने का भी एक प्रयास है. तेजस्वी ने पहले भी गृह मंत्री अमित शाह पर बिहार के विकास और अन्य मुद्दों को लेकर हमले किए हैं. इस पत्र के जरिए वे न केवल नीतिगत सुधार की मांग कर रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों में खामियों को उजागर कर रहे हैं. यह बिहार की जनता को यह संदेश देता है कि RJD उनके हितों और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है.
कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा गया पत्र कई मायनों में अहम साबित होने वाला है. बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में युवा अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती होते हैं. तेजस्वी यादव का यह मुद्दा उठाना इन परिवारों से भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव का संकेत है, जो चुनाव में वोट बटोरने की एक रणनीति हो सकती है. तेजस्वी यादव इस मुद्दे को उठाकर दिखाना चाहते हैं कि वे सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी गंभीरता से सोचते हैं. अर्द्धसैनिक बलों की भर्ती में देरी और अग्निपथ योजना जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना पहले से हो रही है. तेजस्वी इन मुद्दों को उठाकर युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे उनकी समस्याओं को समझते हैं और समाधान के पक्षधर हैं.