नई दिल्ली. ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. भारत किसी भी हालत में पाकिस्तान को बख्शने के मूड में नहीं था. इंडियन आर्म्ड फोर्सेज ऑपरेशन सिंदूर के दूसरे राउंड के लिए पूरी तरह से तैयार थी. इस बार इंडियन नेवी वेस्ट कोस्ट से पाकिस्तान को पूरी तरह से तबाह करने की पूरी प्लानिंग कर रखी थी. राउंड-2 में नौसेना के निशाने पर पाकिस्तान की कमर्शियल सिटी कराची टारगेट पर थी. रणनीतिक और आर्थिक रूप से कराची पाकिस्तान के लिए काफी अहम है, ऐसे में कराची में किसी भी तरह का हमला पाकिस्तान के लिए महाविनाशकारी साबित होता. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को इसका आभास हो गया था, ऐसे में इस्लामाबाद घुटनों पर आ गया और सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा था. यही वजह थी कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबिया ने भारत के फॉरेन मिनिस्टर एस. जयशंकर से बात कर उन्हें पाकिस्तान की इच्छा के बारे में बताया था. हालांकि, विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने अमेरिकी समकक्ष को दो टूक जवाब देते हुए DGMO लेवल पर इस बात को रखने की बात कही थी. दूसरी तरफ, भारत को पाकिस्तान की हैसियत का पता चल गया था, इसलिए मोदी सरकार ने टकराव को आगे नहीं बढ़ाया.
10 मई की सुबह इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के मध्य में स्थित नूर खान एयरबेस पर मिसाइलों से हमला किया था. इसके बाद पाकिस्तान नेवी के कराची पोर्ट को उड़ाने की तैयारी थी. पाकिस्तान को जब इसकी खुफिया जानकारी मिली तो वह अमेरिकी हस्तक्षेप की भीख मांगने लगा था. दूसरी तरफ, रावलपिंडी हमले के बाद मोदी सरकार ने आगे कोई कदम नहीं उठाने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि पाकिस्तान भारत का मुकाबला नहीं कर सकता था. इस हमले ने पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों की पोल खोल दी थी. पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने के बाद 10 मई की सुबह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एस. जयशंकर और NSA अजीत डोभाल से संपर्क करने की कोशिश में जुट गए थे. ऐसा माना जाता है कि जब विदेश मंत्री रुबियो ने युद्ध विराम के लिए पाकिस्तान की इच्छा जताई, तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूरी दृढ़ता से इसका जवाब दिया. उन्होंने रुबियो से कहा कि इस तरह के प्रस्ताव को डीजीएमओ चैनल के माध्यम से लाना चाहिए, कैंपेन का नेतृत्व आर्म्ड फोर्सेज के हाथ में है. इस बीच, भारत ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री की अपील को भी दरकिनार कर दिया था.
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नूर खान एयरबेस पर हमले से खुली कलई
सेंट्रल पाकिस्तान में स्थित नूर खान एयरबेस पर तड़के भारत ने मिसाइलों से जोरदार हमला किया था, उसी दिन सुबह 10:38 बजे पाकिस्तान के DGMO काशिफ अब्दुल्ला ने अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और कराची नौसैनिक बंदरगाह पर ब्रह्मोस मिसाइल हमले के बारे में खुफिया जानकारी होने का दावा किया. पाकिस्तानी डीजीएमओ ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी थी, लेकिन भारत पूरी तरह से अपने इरादे पर अडिग और फुल फ्लेज्ड वॉर क लिए तैयार था. हालांकि, नूर खान समेत 11 एयरबेस को तबाह करने के बाद भारत को रक्षा क्षेत्र में पाकिस्तान की औकात का पता चल गया था. ऐसे में इंडिया ने मामले को और आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा.
इसलिए रोके कदम
टकराव समाप्त करने का भारत का निर्णय रणनीतिक आकलन के बाद आया था. दरअसल, मिशन का उद्देश्य प्राप्त हो चुका था. मामले को आगे बढ़ाने से इस्लामाबाद को पश्चिमी देशों और चीन के सामने विक्टिम कार्ड खेलने का मौका मिल जाएगा. सीधे शब्दों में कहें तो भारत और पाकिस्तान बराबर नहीं हैं और पाकिस्तान की क्षमता को प्रभावी ढंग से बेअसर करने के बाद नई दिल्ली को सैन्य संघर्ष को आगे बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी. भारत आगे की तैयारी भी कर रहा है. साल 2028 में भारतीय सशस्त्र बलों में 31 यूएस-निर्मित प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन शामिल किए जाने के साथ ही भारत हाई एल्टीट्यूड वाले ऑर्म्ड ड्रोन और कम लागत वाले ड्रोन के विकास में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.