भारत के दुश्मन का साथ देना पड़ा भारी, कंपनी के 1600 करोड़ रुपये स्वाहा
- May 18, 2025
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नई दिल्ली. भारत और तुर्की के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की गूंज अब कॉरपोरेट दुनिया में साफ सुनाई देने लगी है. भारत सरकार ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग
नई दिल्ली. भारत और तुर्की के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की गूंज अब कॉरपोरेट दुनिया में साफ सुनाई देने लगी है. भारत सरकार ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग
नई दिल्ली. भारत और तुर्की के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की गूंज अब कॉरपोरेट दुनिया में साफ सुनाई देने लगी है. भारत सरकार ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो सेवा देने वाली कंपनी Çelebi Hava Servisi AS की भारतीय सब्सिडियरी कंपनियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस अचानक रद्द कर दी है. इस फैसले के बाद न सिर्फ कंपनी का भारत में कारोबार ठप हो गया है, बल्कि कंपनी को शेयर बाजार में भी करीब 200 मिलियन डॉलर (₹1,670 करोड़) की भारी भरकम चपत लग चुकी है.
इस फैसले से Çelebi के करीब 3,800 भारतीय कर्मचारी भी सीधे प्रभावित हुए हैं, जिनकी नौकरियों पर अब तलवार लटक रही है. एविएशन मिनिस्ट्री ने जरूर आदेश दिया है कि इन कर्मचारियों को दूसरे ग्राउंड हैंडलर्स में समायोजित किया जाएगा, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया आसान नहीं मानी जा रही.
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Çelebi के शेयर इस्तांबुल स्टॉक एक्सचेंज पर दो ट्रेडिंग सेशन्स में ही 20% गिर गए. 16 मई को इसका शेयर 222 अंक टूटकर 2,002 तुर्की लिरा पर बंद हुआ. इससे कंपनी का मार्केट कैप ₹10,700 करोड़ तक सिमट गया, जो इसके 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर से करीब 30% कम है. यह इस साल के सबसे बड़े एविएशन झटकों में से एक माना जा रहा है.
भारत में Çelebi की ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, अहमदाबाद सहित 9 बड़े एयरपोर्ट्स पर चल रही थीं. कंपनी की भारतीय इकाइयों से FY24 में ₹1,522 करोड़ की रेवेन्यू और ₹393 करोड़ का EBITDA आया था. इसके दो सबसे लाभकारी यूनिट – Çelebi Delhi Cargo और Çelebi NAS – ने कुल मिलाकर ₹188 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया था.
इसका मतलब साफ है कि भारत कंपनी की ग्लोबल आय का एक-तिहाई हिस्सा दे रहा था, यानी करीब $195 मिलियन. अब यह पूरा हिस्सा शून्य हो गया है. इसके अलावा कंपनी ने भारत में लगभग ₹200–250 मिलियन (₹1,670–2,100 करोड़) का निवेश भी किया था, जो अब डूबता नजर आ रहा है.
सरकार की ओर से इस फैसले के पीछे “राष्ट्रीय सुरक्षा” का हवाला दिया गया है. लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम भारत-तुर्की के संबंधों में हाल के दिनों में आए तनाव से जुड़ा है. तुर्की ने लगातार पाकिस्तान का समर्थन किया है, खासकर कश्मीर के मुद्दे पर. भारत इससे नाराज़ है और इसे लेकर कई बार आपत्ति भी जता चुका है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों ने Çelebi की मौजूदगी को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना और कार्रवाई की सिफारिश की.
Çelebi ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है और सोमवार को इस पर सुनवाई होनी है. कंपनी ने इस कार्रवाई को गलत बताया है और कहा है कि उन्होंने सभी कानूनी नियमों का पालन किया है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि मामला “नेशनल सिक्योरिटी” से जुड़ा है, इसलिए कोर्ट से भी राहत मिलना मुश्किल हो सकता है.
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भले ही कोर्ट कंपनी को राहत दे दे, लेकिन खोए हुए एयरपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स और निवेशकों का भरोसा दोबारा हासिल करना आसान नहीं होगा.
कंपनी ने भारत में जो निवेश किया है, उसमें ग्राउंड हैंडलिंग सिस्टम, कार्गो टर्मिनल्स, मशीनरी और कई लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं. इसके अलावा Çelebi पर भारत से जुड़े करीब ₹183 करोड़ के बैंक लोन भी हैं. अब जबकि कंपनी का पूरा ऑपरेशन ही बंद हो गया है, इन कर्जों की अदायगी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
कई एयरपोर्ट्स पहले ही Çelebi की जगह दूसरे ग्राउंड हैंडलर्स को अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट दे चुके हैं. इससे साफ है कि कंपनी के लिए भारत में जल्द वापसी मुश्किल है. ऐसे में निवेशकों और कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी चिंता की बात है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से अन्य विदेशी ग्राउंड हैंडलर्स को भी संकेत मिलेगा कि भारत में काम करने के लिए केवल बिजनेस स्किल्स नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक समझ भी जरूरी है.
