चित्रकूट पाठा का वो डरावना दौर जब शाम होते ही घरों में कैद हो जाते थे लोग
- May 9, 2025
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Last Updated:May 09, 2025, 18:34 IST गांव के लोगों ने बातचीत में बताया कि एक समय था कि जब यहां डकैतों का राज हुआ करता था और हम
Last Updated:May 09, 2025, 18:34 IST गांव के लोगों ने बातचीत में बताया कि एक समय था कि जब यहां डकैतों का राज हुआ करता था और हम
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हाइलाइट्स
चित्रकूट: चित्रकूट का नाम सुनते ही एक समय में लोगों के जेहन में सबसे पहले जो तस्वीर उभरती थी, वो थी बंदूकें लिए खूंखार डकैत, क्योंकि बुंदेलखंड का चित्रकूट हमेशा से दस्यु प्रभावित क्षेत्र रहा है, यहां एक से बढ़कर एक खूंखार डकैत रहा करते थे. इसमें से एक डकैत ऐसा भी था जो जंगलों में रहकर प्रदेश की सरकार व सांसद विधायक भी बनवा दिया करता था. आलम यह था कि पाठा क्षेत्र के आदिवासी या अन्य समाज के लोग शाम होते ही अपने घरों में दरवाजा बंद करके बैठ जाते थे. अगर डकैतों के आतंक की बात करें तो चित्रकूट में सबसे ज्यादा राज करने वाले ददुआ बलखड़िया, बबली, लवलेश सहित अन्य डकैत हुआ करते थे.
शाम होते ही घर के दरवाजे हो जाते थे बंद
लोकल 18 की टीम चित्रकूट के उस गांव पहुंची, जो कि डकैतों का गढ़ हुआ करता था. गांव के लोगों ने बातचीत में बताया कि एक समय था कि जब यहां डकैतों का राज हुआ करता था, तो हम लोग घर से निकलने में भी कतराते थे. उन्होंने बताया घर की बहू-बेटियां भी घर से निकल नहीं पाती थी और डकैतों की तरफ से फरमान जारी हुआ करते थे. अगर हम लोग उसका पालन नहीं करते थे, तो उनके द्वारा हम लोगों को मारा-पीटा जाता था. मारपीट के डर से हम लोगों को उनके फरमान का पालन करना पड़ता था. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि एक वक्त ऐसा था कि गांव में हर दिन डर के साए में कटता था.
ऐसे हुआ डकैतों का खात्मा
अगर इनके खात्मे की बात जाए तो सबसे पहले 22 जुलाई 2007 को उत्तर प्रदेश के मानिकपुर थाना क्षेत्र के आल्हा गांव के पास झलमल के जंगल में पुलिस और एसटीएफ के द्वारा ददुआ को मुठभेड़ में मार गिराया गया था. अगर बबली कोल की मौत की बात करें, तो जानकारी के अनुसार फिरौती की रकम के बंटवारे को लेकर कोल गैंग के डकैत आपस में भिड़ पड़े थे. जिले की सीमा से सटे सतना के चमरी पहाड़ के जंगल में आपसी भिड़ंत के दौरान सितंबर 2019 में देर रात डाकुओं के बीच कई राउंड गोलियां चलीं, जिसमें सरगना बबुली की मौत हो गई थी. इसके बाद बचे कुछ डकैतों ने अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया जिसके बाद से पाठा क्षेत्र में दस्यु साम्राज्य एकदम से खत्म हो गया.
डकैतों के खात्मे के बाद लोगों ने ली राहत की सास
ग्रामीणों ने आगे की बातचीत में बताया कि जब डकैतों का खात्मा चित्रकूट से हो गया तब हम लोगों को काफी ज्यादा खुशी मिली, क्योंकि उसके बाद से हम लोग खुलकर अपना जीवन जी रहे हैं और घर से बहन बेटी आराम से पढ़ाई या अन्य कार्य के लिए रोड पर जा रही हैं और रात हो या दिन गांव में किसी भी प्रकार की कोई दहशत नहीं है.
