February 20, 2026
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प्रदोष व्रत के दिन कालसर्प दोष से मिलेगा छुटकारा, जानें क्या करना है?

  • May 9, 2025
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Last Updated:May 09, 2025, 00:27 IST Pradosh Vrat 2025: ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने कहा कि प्रदोष व्रत भोलेनाथ की कृपा पाने का सशक्त माध्यम है. यह व्रत न

प्रदोष व्रत के दिन कालसर्प दोष से मिलेगा छुटकारा, जानें क्या करना है?

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Pradosh Vrat 2025: ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने कहा कि प्रदोष व्रत भोलेनाथ की कृपा पाने का सशक्त माध्यम है. यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था बल्कि आत्मिक विकास और जीवन की समस्याओं से मुक्ति का मार्ग भी है.

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कालसर्प

कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए यह उपाय करें.

ऋषिकेश. हिंदू धर्म में भगवान शिव को संहार के देवता और कृपा के सागर के रूप में जाना जाता है. उनकी आराधना से न केवल सांसारिक दुखों से मुक्ति मिलती है बल्कि आत्मिक शांति और शक्ति की प्राप्ति भी होती है. शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है. यह व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है और शिवजी के रौद्र रूप की शांति के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है. 9 मई 2025 को प्रदोष व्रत पड़ रहा है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता लेकर आएगा. यह व्रत मानसिक शुद्धता, जीवन की बाधाओं से मुक्ति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय माना जाता है. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित गृह स्थानम के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने कहा कि प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का सशक्त माध्यम बन सकता है. यह व्रत केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि आत्मिक विकास और जीवन की समस्याओं से मुक्ति का मार्ग भी है.

उन्होंने कहा कि शिवजी के प्रति समर्पण, भक्ति और नियम से किया गया व्रत निश्चित रूप से व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी परिवर्तन ला सकता है. इस व्रत को पूरे श्रद्धा भाव से करें और शिव की कृपा से जीवन को सुखमय बनाएं. प्रदोष व्रत में भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और शाम के समय विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस समय भगवान शंकर अपने भक्तों पर विशेष दृष्टि डालते हैं. प्रदोष काल यानी सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पूर्व और बाद का समय शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस समय शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, दही और बेलपत्र चढ़ाया जाता है. धूप-दीप से आरती की जाती है और शिव मंत्रों का उच्चारण किया जाता है.

कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय
प्रदोष व्रत केवल पूजा या उपवास तक सीमित नहीं है, इस दिन शिव भक्ति में डूबकर स्तोत्रों का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है. खासतौर पर ‘काल भैरव अष्टक’ और ‘रुद्राष्टक’ स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावशाली होता है. ये स्तोत्र भगवान शिव के रौद्र और रक्षक रूप की स्तुति करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इन स्तोत्रों का पाठ करने से कालसर्प दोष, पितृदोष और अन्य ग्रह बाधाएं शांत होती हैं. कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्तियों के लिए प्रदोष व्रत अत्यंत फलदायक होता है. यह व्रत उनकी कुंडली में चल रही बाधाओं को दूर कर जीवन में सकारात्मकता लाता है. जो लोग लगातार संघर्ष, रुकावट या मानसिक अशांति से गुजर रहे हैं, उनके लिए प्रदोष व्रत शिव कृपा पाने का मार्ग बन सकता है.

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प्रदोष व्रत के दिन कालसर्प दोष से मिलेगा छुटकारा, जानें क्या करना है?

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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