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1905 में आया विनाशकारी भूकंप, फिर भी टस से मस नहीं हुआ यह चर्च! अब पर्यटकों की

  • May 7, 2025
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Last Updated:May 07, 2025, 15:54 IST Dharmshala Tourist Spot: धर्मशाला स्थित सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस चर्च 1852 में बना एक ऐतिहासिक और खूबसूरत चर्च है, जो नव-गॉथिक

1905 में आया विनाशकारी भूकंप, फिर भी टस से मस नहीं हुआ यह चर्च! अब पर्यटकों की

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Dharmshala Tourist Spot: धर्मशाला स्थित सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस चर्च 1852 में बना एक ऐतिहासिक और खूबसूरत चर्च है, जो नव-गॉथिक शैली में निर्मित है. हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित यह चर्च बेल्जियम की रंगीन कांच की …और पढ़ें

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सेंट

सेंट जॉन धर्मशाला चर्च 

हाइलाइट्स

  • धर्मशाला का सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस चर्च 1852 में निर्मित हुआ था.
  • चर्च की बेल्जियम की रंगीन कांच की खिड़कियां मुख्य आकर्षण हैं.
  • 1905 के कांगड़ा भूकंप में भी चर्च सुरक्षित रहा.

धर्मशाला. आज आपको बताते हैं हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित एक ऐतिहासिक चर्च के बारे में जिसकी खूबसूरती की चर्चा हमेशा होती है. इसे देखने के लिए रोजाना यहां लोग पहुंचते हैं. यह स्थल है धर्मशाला का सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस चर्च. जानकारी के अनुसार, यह चर्च 1852 में निर्मित हुआ था. यह हिमाचल प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण चर्चों में से एक है.

हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित है शांतिपूर्ण इमारत
धर्मशाला के पास और मैक्लॉडगंज के रास्ते में स्थित यह नव-गॉथिक शैली में बना चर्च जॉन द बैपटिस्ट को समर्पित है. हरे-भरे देवदार के जंगलों के बीच स्थित यह चर्च शांति और सौंदर्य का प्रतीक है. इसकी बेल्जियम की रंगीन कांच की खिड़कियां इसे और खास बनाती हैं.

चर्च की खिड़कियां हैं मुख्य आकर्षण का केंद्र
यह विलक्षण चर्च घने जंगलों में बनाया गया था. इसी कारण इसे ‘सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस’ कहा जाता है. यह धर्मशाला की सबसे पुरानी संरचनाओं में से एक है. यह चर्च लॉर्ड एल्गिन का अंतिम विश्राम स्थल भी है, जो ब्रिटिश राज के दौरान भारत के गवर्नर जनरल और वायसरायों में से एक थे.

उनकी पत्नी लेडी एल्गिन ने इस चर्च के लिए बेल्जियम की रंगीन कांच की खिड़कियां दान की थीं. यह खिड़कियां आज भी इस चर्च का मुख्य आकर्षण हैं.

भूकंप में भी खड़ा रहा यह मजबूत चर्च
यह चर्च इतनी मजबूत संरचना है कि 1905 के विनाशकारी कांगड़ा भूकंप में भी यह सुरक्षित बचा रहा. इस भूकंप में करीब 19,800 लोग मारे गए थे और कांगड़ा, मैक्लॉडगंज और धर्मशाला की कई इमारतें तबाह हो गई थीं.

कैसे पहुंचे चर्च तक
यह चर्च मल्लीताल रोड पर स्थित है. यहां तक स्थानीय रिक्शा या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है. चूंकि यह धर्मशाला का एक प्रसिद्ध आकर्षण है, इसलिए अधिकतर रिक्शा और टैक्सी चालक आपको यहां छोड़ देंगे. अगर आप मॉल रोड या उसके आस-पास ठहरे हैं, तो आप पहाड़ी हवा का आनंद लेते हुए यहां तक पैदल भी जा सकते हैं.

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