नई दिल्ली: पाकिस्तान की ‘मिसाइल डिप्लोमेसी’ पर अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के एक बयान ने तीखी चोट की है. करजई ने न केवल पाकिस्तान की सैन्य मानसिकता पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी बताया कि कैसे इस्लामाबाद इतिहास की गलत व्याख्या करके अपने पड़ोसियों के जख्मों पर नमक छिड़कता है. पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी बैलिस्टिक मिसाइल ‘अब्दाली’ का परीक्षण किया है. पाकिस्तान के पास ‘गजनवी’ और ‘गौरी’ नाम की मिसाइलें भी हैं. इन तीनों नामों का संबंध उन ऐतिहासिक मुस्लिम आक्रांताओं से है, जिन्होंने मध्यकाल में अफगान क्षेत्र से भारत पर हमले किए थे. भले ही ये हमलावर अफगान इतिहास का हिस्सा हैं, लेकिन अफगानिस्तान इन्हें आक्रांता और आततायी के रूप में ही देखता है, न कि किसी महान सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधि के तौर पर.
‘अफगानों का उत्पीड़न कर रहा पाकिस्तान’
‘
करजई ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पाकिस्तान इन नामों का इस्तेमाल तो करता है, लेकिन वहां रहने वाले अफगानों के साथ उसका व्यवहार अपमानजनक और उत्पीड़न भरा है. उन्होंने ट्विटर पर कहा, ‘पाकिस्तान को अपने वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्थानों का नाम महान अफगान हस्तियों के नाम पर रखना चाहिए, न कि उन हमलावरों के नाम पर जिन्होंने क्षेत्र में खून-खराबा फैलाया. अफगान पाकिस्तान से एक सभ्य और सम्मानजनक संबंध चाहता है, न कि ऐसे प्रतीकों के सहारे रिश्तों को बिगाड़ने की कोशिश.’