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तकनीक के दौर में आज भी यूपी के इस जिले में होता है बैलगाड़ी का इस्तेमाल…

  • May 6, 2025
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Last Updated:May 06, 2025, 14:48 IST Kaushambi News: कौशांबी के अझुहा क्षेत्र के गांवों में आज भी बैलगाड़ी का उपयोग होता है. किसान इसे कृषि कार्यों और फसल

तकनीक के दौर में आज भी यूपी के इस जिले में होता है बैलगाड़ी का इस्तेमाल…

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Kaushambi News: कौशांबी के अझुहा क्षेत्र के गांवों में आज भी बैलगाड़ी का उपयोग होता है. किसान इसे कृषि कार्यों और फसल ढोने के लिए इस्तेमाल करते हैं. बैलगाड़ी की मरम्मत और निर्माण खुद किसान करते हैं.

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बैलगाडी 

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हाइलाइट्स

  • कौशांबी के गांवों में आज भी बैलगाड़ी का उपयोग होता है.
  • बैलगाड़ी का उपयोग कृषि कार्यों और यातायात के लिए किया जाता है.
  • आधुनिक साधनों के बावजूद पुरानी परंपराएं कायम हैं.

कौशांबी: आज के तकनीकी युग में जब लोग हाईवे पर तेज़ रफ्तार से दौड़ते हुए वाहनों में सफर करते हैं, तब उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के कुछ गांवों में बैलगाड़ी का इस्तेमाल आज भी देखने को मिलता है. यह गांव उस समय की याद दिलाता है जब बैलगाड़ी ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा हुआ करती थी. आश्चर्यजनक बात यह है कि, यहां के लोग आज भी बैलगाड़ी का उपयोग करते हैं, यह यह दर्शाता है कि पुरानी परंपराओं और कृषि जीवनशैली का कितना गहरा संबंध है.

बैलगाड़ी का ऐतिहासिक महत्व
कई सालों पहले जब सड़कें और यातायात के आधुनिक साधन नहीं थे, तब बैलगाड़ी ही वह साधन हुआ करती थी, जिससे लोग यात्रा करते थे. बैल और बैलगाड़ी का उपयोग कृषि कार्यों के साथ-साथ यातायात के लिए भी किया जाता था. वे समय अलग था, लेकिन उस वक्त की जीवनशैली की विशेषता बैलगाड़ी ही थी. बैलगाड़ी ग्रामीण जीवन की पहचान बन चुकी थी. अब, आधुनिक साधनों के बावजूद इस गांव में यह प्राचीन परंपरा जारी है.

कौशांबी के गांव में बैलगाड़ी का महत्व
कौशांबी जिले के अझुहा क्षेत्र के गांव में बैलगाड़ी का उपयोग अब भी बड़े पैमाने पर किया जाता है. यहां के किसान अपनी कृषि कार्यों के लिए बैलगाड़ी का इस्तेमाल सालभर करते हैं. गेहूं या धान की फसल के समय बैलगाड़ी का उपयोग खेतों से लेकर बाज़ार तक सामान लाने और ले जाने के लिए किया जाता है. किसानों के लिए यह न केवल कृषि कार्य में मददगार है, बल्कि यह एक पारंपरिक तरीका भी है. बैल को पालने की परंपरा भी यहां की कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

बैलगाड़ी का निर्माण और मरम्मत
इस गांव में बैलगाड़ी बनाने के लिए किसी मिस्त्री की जरूरत नहीं होती. यहां के लोग खुद ही बैलगाड़ी का निर्माण और उसकी मरम्मत करते हैं. यह बैलगाड़ी लकड़ी से बनी होती है, जिसमें दोनों तरफ लोहे के पहिए लगाए जाते हैं. यदि बैलगाड़ी में कोई खराबी आ जाती है, तो किसान खुद ही उसे ठीक कर लेते हैं. यह बैलगाड़ी इतनी मजबूत होती है कि कई सालों तक बिना किसी समस्या के काम करती है. यहां बैल और बैलगाड़ी का प्रयोग खेतों में जुताई, फसल ढोने और अन्य कृषि कार्यों के लिए किया जाता है. बैल को पालतू जानवर के रूप में रखा जाता है, जो किसान के लिए कृषि कार्य में सहायक होता है. बैल से खेतों की जुताई करना भी एक आम प्रथा है. बैलगाड़ी का उपयोग करने से किसान अपना अधिकांश काम आसानी से और सस्ते में कर पाते हैं, जबकि यह पुरानी परंपरा भी बनी रहती है.

नवीनतम तकनीकी उपकरणों के बावजूद बैलगाड़ी का उपयोग
जहां एक ओर आधुनिक तकनीकी उपकरणों और वाहनों का चलन बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर, इस गांव के लोग बैलगाड़ी का प्रयोग सटीक तरीके से करते हैं. यह दर्शाता है कि लोग अपनी पुरानी परंपराओं को सहेज कर रखते हैं और आधुनिकता के साथ-साथ इनका उपयोग करते हैं. बैलगाड़ी का प्रयोग यहां की जीवनशैली और कृषि कार्यों का अहम हिस्सा है.

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