मंडी में जमीन के नीचे मिलती हैं दिव्य मोहरें, फिर बनते हैं देवताओं के रथ
- May 2, 2025
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Last Updated:May 02, 2025, 20:07 IST मंडी जिला अपनी पारंपरिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है, जहां देवी-देवताओं के रथ विशेष प्रक्रिया से तैयार किए जाते हैं. भूमि से
Last Updated:May 02, 2025, 20:07 IST मंडी जिला अपनी पारंपरिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है, जहां देवी-देवताओं के रथ विशेष प्रक्रिया से तैयार किए जाते हैं. भूमि से
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हाइलाइट्स
मंडी: हिमाचल प्रदेश का मंडी जिला न केवल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती बल्कि अपनी आध्यात्मिक संस्कृति के लिए भी जाना जाता है. यहां अक्सर भूमि की खुदाई के दौरान दिव्य मोहरे (धातु या पत्थर की देव आकृतियाँ) मिलते हैं. मान्यता है कि जब किसी गांव में यह मोहरे मिलते हैं, तो देवता किसी एक व्यक्ति को सपने में प्रकट होकर अपना संदेश देते हैं. यह सपना ही उस देवता की उपस्थिति की पुष्टि माना जाता है.
देवता की प्रतिष्ठा और रथ निर्माण
सपने के बाद गांववाले उस मोहरे को विधिपूर्वक प्रतिष्ठित करते हैं. इसके बाद देवता के लिए लकड़ी से विशेष रथ (देवरथ) तैयार किया जाता है. यह रथ सुंदर नक्काशी और पारंपरिक डिजाइनों से सजाया जाता है. रथ के चारों ओर उन सभी मोहरों को लगाया जाता है जो संबंधित देवता से जुड़े होते हैं. परंपरा के अनुसार, यह रथ केवल शुभ मुहूर्त में और विशेष रीति-रिवाजों के साथ बनाया जाता है.
पूजन और क्षेत्र भ्रमण की परंपरा
देवरथ के बनने के बाद इसकी विधिवत पूजा होती है और देवता को क्षेत्र भ्रमण के लिए निकाला जाता है. रथ को पूरे गांव और आसपास के इलाकों में घुमाया जाता है. लोग अपने घरों में इस देवता को आमंत्रित करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. यह प्रक्रिया समुदाय में एकजुटता और भक्ति की भावना को मजबूत करती है.
सोने-चांदी के होते थे प्राचीन रथ
पहले के समय में बनाए गए रथ लकड़ी के ढांचे में होते थे, लेकिन उन पर सोने और चांदी से बने मोहरे जड़े जाते थे. इन रथों की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ शिल्प कौशल भी अद्वितीय होता था.
शिवरात्रि में 250 से अधिक देवता लगाते हैं हाजिरी
मंडी जिले में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव इस परंपरा का जीवंत उदाहरण है. सात दिवसीय इस उत्सव में मंडी के लगभग 250 से अधिक देवी-देवता अपने रथों सहित ‘राज दरबार’ पहुंचते हैं. यहां वे अपनी हाजिरी लगाते हैं और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हैं.
