कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों एडवेंचर टूरिज्म युवाओं के लिए स्वरोजगार का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है. खासकर कुल्लू जैसे पर्यटन स्थलों पर युवाओं की एक बड़ी संख्या साहसिक गतिविधियों से जुड़ रही है. पर्यटन विभाग भी समय- समय पर इस क्षेत्र की निगरानी करता है, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित अनुभव मिल सके. इसी कड़ी में कुल्लू के पीरडी रिवर राफ्टिंग सेंटर में राफ्टिंग गाइड के लिए ट्रायल प्रक्रिया शुरू की गई है.
115 युवाओं ने लिया ट्रायल में हिस्सा
यह ट्रायल अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान और पर्यटन विभाग की संयुक्त तकनीकी कमेटी द्वारा आयोजित किया गया. कुल्लू के व्यास नदी में आयोजित इस प्रक्रिया में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों और नेपाल के कुछ युवाओं समेत कुल 115 प्रतिभागियों ने भाग लिया. तकनीकी कमेटी के अनुदेशक गिमनर नार सिंह ने जानकारी दी कि इस ट्रायल में रिवर राफ्टिंग संचालन, तैराकी, सुरक्षा तकनीक और नदी की धाराओं को नियंत्रित करने की क्षमता को परखा गया.
इन प्रतिभागियों को मिलेगा लाइसेंस
इस ट्रायल को सफलतापूर्वक पास करने वाले युवाओं को पर्यटन विभाग की तरफ से रिवर राफ्टिंग गाइड का लाइसेंस जारी किया जाएगा. यह लाइसेंस सिर्फ कौशल परीक्षण के आधार पर ही जारी किया जाता है, जिससे सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो. इससे ना सिर्फ युवाओं को स्वरोजगार का मौका मिलता है, बल्कि पर्यटन को भी एक संरचित रूप में बढ़ावा मिलता है.
पहले से ही 450 गाइड हैं पंजीकृत
गिमनर सिंह ने लोकल18 को बताया कि फिलहाल कुल्लू जिले में करीब 450 रिवर राफ्टिंग गाइड पर्यटन विभाग के साथ पंजीकृत हैं. हर साल इनका लाइसेंस ट्रायल प्रक्रिया के बाद रिन्यू किया जाता है. नए युवाओं को भी बेसिक कोर्स करवाकर इस क्षेत्र से जोड़ा जा रहा है, जिससे राज्य में साहसिक पर्यटन का दायरा बढ़े और युवा आत्मनिर्भर बन सकें.