सेमीकंडक्टर ड्रीम को बड़ा झटका, 700 करोड़ का प्लान हुआ बंद
- May 1, 2025
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Last Updated:May 01, 2025, 22:16 IST Zoho ने 700 मिलियन डॉलर के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट को तकनीकी भरोसे की कमी के कारण होल्ड पर रखा. मैसूर में चिप फैक्ट्री
Last Updated:May 01, 2025, 22:16 IST Zoho ने 700 मिलियन डॉलर के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट को तकनीकी भरोसे की कमी के कारण होल्ड पर रखा. मैसूर में चिप फैक्ट्री
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यह चिप फैक्ट्री मैसूर में बनाई जानी थी.
हाइलाइट्स
नई दिल्ली. भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho ने अपने 700 मिलियन डॉलर के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को फिलहाल होल्ड पर रख दिया है. कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें मौजूदा तकनीक पर पूरा भरोसा नहीं था, और जब तक कोई बेहतर टेक्नोलॉजिकल विकल्प सामने नहीं आता, तब तक कंपनी इस योजना को आगे नहीं बढ़ाएगी.
वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में निवेश भारी पूंजी मांगता है और इसमें सरकारी सहयोग की जरूरत होती है. हम चाहते थे कि टैक्सपेयर्स के पैसों का इस्तेमाल करने से पहले हमें टेक्नोलॉजी को लेकर पूरी स्पष्टता हो. फिलहाल हमें ऐसा यकीन नहीं मिला, इसलिए हमने प्रोजेक्ट को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया है.”
मैसूर में बननी थी चिप फैक्ट्री
Zoho की योजना कर्नाटक के मैसूर में लगभग 400 मिलियन डॉलर की लागत से एक चिप निर्माण इकाई स्थापित करने की थी. इस प्लांट में करीब 460 नौकरियों के अवसर बनने थे. यह यूनिट खास तौर पर कंपाउंड सेमीकंडक्टर तैयार करने के लिए डिज़ाइन की गई थी, जिसका उपयोग विशेष व्यवसायिक उपकरणों में होता है.
टेक्नोलॉजी पार्टनर नहीं मिलने से ठप हुआ प्रोजेक्ट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को ऐसा कोई मजबूत तकनीकी साझेदार नहीं मिला जो इस क्षेत्र में उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन दे सके. इसी वजह से कंपनी ने फिलहाल कदम पीछे खींच लिए हैं. Zoho की यह योजना केंद्र सरकार की PLI स्कीम के अंतर्गत पेश की गई थी, लेकिन तकनीक पर भरोसे की कमी ने इसे आगे बढ़ने से रोक दिया.
भारत के चिप मिशन को छोटा झटका
हालांकि यह प्रोजेक्ट रुका है, लेकिन भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब भी प्रगति पर है. सरकार ने अब तक एक फैब्रिकेशन यूनिट और चार टेस्टिंग व पैकेजिंग प्लांट्स को मंजूरी दी है. यह पूरी योजना 2020 में शुरू की गई थी और 2024 में इसे संशोधित भी किया गया. Zoho एक 12 अरब डॉलर की निजी सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो दुनियाभर के 150 से ज्यादा देशों में सेवाएं देती है और इसके 12 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं.
