5 घंटे मीटिंग, गहमागहमी वाला माहौल और पंजाब का विरोध,अब हरियाणा को मिलेगा पानी
- May 1, 2025
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चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बड़ा फैसला लिया है. पांच घंटे तक चली
चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बड़ा फैसला लिया है. पांच घंटे तक चली
चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बड़ा फैसला लिया है. पांच घंटे तक चली तनावपूर्ण मीटिंग में बीबीएमबी ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का फैसला लिया है. ऐसे में पंजाब सरकार के कड़े विरोध के बावजूद हरियाणा को भाखड़ा डैम से तत्काल 8500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी दिया जाएगा. यह निर्णय केंद्रीय बिजली मंत्रालय के निर्देश पर लिया गया है. हालांकि, अब भी इसमें एक पेच फंसा हुआ है.
जानकारी के अनुसार, बीबीएमबी बोर्ड की बैठक लगभग साढ़े पांच घंटे चली, जिसमें पंजाब और हरियाणा आमने-सामने रहे. चेयरमैन मनोज त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का माहौल तनावपूर्ण रहा. बीबीएमबी के इस फैसले से पंजाब में राजनीतिक तापमान बढ़ सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही हरियाणा को पानी देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर चुके हैं.
बीबीएमबी के मुख्यालय में हुई बैठक में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और सिंध आयोग व भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने मानवीय आधार पर हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए पंजाब के विरोध के खिलाफ मतदान किया, जबकि हिमाचल प्रदेश ने तटस्थ भूमिका निभाई. हालांकि, पंजाब सरकार ने इस निर्णय को स्वीकार करने से मना कर दिया है.
पंजाब की ओर से प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार और मुख्य अभियंता ने पूरी बैठक के दौरान अपनी दृढ़ स्थिति बनाए रखी. जब बीबीएमबी ने हरियाणा को तत्काल अतिरिक्त पानी देने का निर्णय लिया, तो पंजाब सरकार के प्रतिनिधि नाराज हो गए और उन्होंने कार्यवाही पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. एक और बड़ा विवाद तब सामने आया जब भाखड़ा डैम के मुख्य अभियंता ने कहा कि वह तभी पानी छोड़ेगा जब पंजाब की ओर से आधिकारिक ‘इंडेंट’ (अनुरोध) प्रस्तुत किया जाएगा.
पंजाब की तरफ से इंटेंड देना जरूरी है
भाखड़ा डैम के रेगुलेशन मैनुअल के अनुसार, पंजाब का इंडेंट देना अनिवार्य है. लेकिन बीबीएमबी बोर्ड ने तर्क दिया कि विशेष परिस्थिति में हरियाणा को पानी देने के लिए इस मैनुअल का पालन आवश्यक नहीं है. पंजाब ने इस तर्क से सहमति जताने से इनकार कर दिया. एक सुझाव यह भी दिया गया कि रेगुलेशन मैनुअल में संशोधन के लिए तीन-सदस्यीय तकनीकी समिति बनाई जाए, लेकिन बोर्ड ने इसे गैर-ज़रूरी बताया.
पंजाब पहले ही दे रहा है पानीः सरकार
पंजाब सरकार ने यह भी पक्ष रखा कि यदि हरियाणा को यह अतिरिक्त पानी पीने के लिए दिया जाना है, तो उसकी आबादी के अनुसार उसे अधिकतम 1700 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है, जबकि पंजाब पहले से ही 4000 क्यूसेक पानी जारी कर रहा है. यह मुद्दा पिछले दो दिनों से राजनीतिक रूप धारण कर चुका है. पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री आमने-सामने हैं, जबकि केंद्र सरकार का रुख हरियाणा के पक्ष में झुका हुआ प्रतीत हो रहा है.
दोबारा मीटिंग बुलाने के लिए कहा
बैठक में हरियाणा की ओर से जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, पंजाब की ओर से प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार, राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से), भारत सरकार और बीबीएमबी के प्रतिनिधि शामिल हुए. जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज सुबह पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों से समन्वय किया और केंद्रीय बिजली मंत्रालय के निर्देश पर बीबीएमबी को दोबारा बैठक बुलाने को कहा.
रात नौ बजे तक चलती रही मीटिंग
बीबीएमबी ने बुधवार को शाम चार बजे बैठक बुलाई, जो रात साढ़े नौ बजे तक चली. इस दौरान पंजाब ने यह पक्ष रखा कि हरियाणा का दरियाई जलों में 2.987 एमएएफ हिस्सा है, लेकिन हरियाणा अब तक 3.110 एमएएफ पानी उपयोग कर चुका है, जो 104 प्रतिशत बनता है. पंजाब के अधिकारियों ने यह भी कहा कि राज्य में विशेषकर कपास (नरमा) की बुवाई के लिए पानी की मांग अधिक है. यदि हरियाणा को अतिरिक्त पानी दिया गया, तो भाखड़ा डैम का जलस्तर और गिर जाएगा.
10 दिन बाद मांग बढ़ाकर 8500 क्यूसेक कर दी
बैठक में यह तथ्य भी सामने रखा गया कि 4 अप्रैल को बीबीएमबी की पिछली बैठक में हरियाणा ने मानवीय आधार पर 4000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, जिसे पंजाब ने पेयजल संकट के मद्देनज़र मंजूरी दी थी. लेकिन महज 10 दिन बाद हरियाणा ने मांग बढ़ाकर 8500 क्यूसेक कर दी, जबकि आबादी के लिहाज़ से उसे केवल 1700 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है. यह भी कहा गया कि अब हरियाणा यह 8500 क्यूसेक पानी कृषि कार्यों के लिए लेना चाहता है. पंजाब सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ विस्तृत तीन पृष्ठों का विरोध पत्र दर्ज कराया है.
