February 21, 2026
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मुनाफा कम, मेहनत ज्यादा… हिमाचल में इस व्यवसाय की राह मुश्किल! गद्दी समुदाय

  • April 30, 2025
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Last Updated:April 30, 2025, 14:29 IST Kangra News: कांगड़ा जिले में गद्दी समुदाय के लोग आज भी भेड़ पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, लेकिन यह काम

मुनाफा कम, मेहनत ज्यादा… हिमाचल में इस व्यवसाय की राह मुश्किल! गद्दी समुदाय

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Kangra News: कांगड़ा जिले में गद्दी समुदाय के लोग आज भी भेड़ पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, लेकिन यह काम अब चुनौतीपूर्ण बन चुका है. प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और सीमित मुनाफे के कारण भेड़ पालन व्यवसाय धीरे-…और पढ़ें

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भेड़

भेड़ बकरियां 

हाइलाइट्स

  • हिमाचल में गद्दी समुदाय के लोग भेड़ पालन करते हैं.
  • भेड़ पालन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
  • हिमाचल में लगभग 9 लाख भेड़ें हैं.

कांगड़ा. जिला कांगड़ा में बड़ी संख्या में गद्दी समुदाय के लोग रहते हैं. गद्दी समुदाय हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पाया जाता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में इनकी आबादी 1,78,130 है. गद्दी समुदाय के लोगों का मुख्य व्यवसाय पहले भेड़ पालन हुआ करता था. बदलते वक्त के साथ यह व्यवसाय कम होता गया. हालांकि आज भी कुछ लोग भेड़ पालन से अपनी आजीविका चला रहे हैं.

भेड़ पालन बना चुनौतीपूर्ण पेशा
भेड़ पालन का व्यवसाय बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसमें भेड़ पालकों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. वे हमेशा मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहते हैं. रात को अपने पशुओं के साथ कहीं भी रुकने की व्यवस्था करनी होती है. इसके अलावा उन्हें मीलों पैदल चलना पड़ता है.

हिमाचल में हैं करीब 9 लाख भेड़ें
हिमाचल प्रदेश में लगभग 9 लाख भेड़ें हैं. यहां पर विदेशी नस्लों रैमबुले और रशियन मैरिनो के मेढ़ों द्वारा स्थानीय नस्ल की भेड़ों का प्रजनन करवाया जाता है. इसका उद्देश्य स्थानीय भेड़ों से मिलने वाली ऊन की मात्रा बढ़ाना है. सुधारी नस्ल की भेड़ों से 2.5 किलोग्राम प्रति भेड़ ऊन प्राप्त होती है. वहीं रामपुर बुशहरी और गद्दी जैसी स्थानीय नस्लों से 1 किलोग्राम से भी कम ऊन प्राप्त होती है.

प्रकृति की मार सहते हैं भेड़ पालक
भेड़ पालकों का जीवन सदियों से ही बेहद कठिन रहा है. सर्दियों में वे मैदानी इलाकों की ओर चले जाते हैं और गर्मियों में पहाड़ों की ओर लौट आते हैं. इस दौरान वे बारिश, तूफान, आंधी जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करते हैं. साथ ही पशुओं की बीमारियां भी उनकी चिंता का विषय रहती हैं.

मेहनत ज्यादा, मुनाफा कम
भेड़ पालक सरजू कपूर बताते हैं कि यह व्यवसाय अब लोग धीरे-धीरे छोड़ रहे हैं. इसमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है. परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है. चुनौतियां बहुत हैं और आमदनी उतनी नहीं हो पा रही. उन्होंने कहा कि भले ही अब यह काम कम हो गया है, लेकिन समुदाय के अभी भी कई परिवार ऐसे हैं जो भेड़ पालन कर रहे हैं और इसी से अपनी जीविका चला रहे हैं.

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