मैसूर: आज के दौर में जहां युवा पढ़ाई पूरी कर शहरों का रुख कर रहे हैं, वहीं नंजनगुडु तालुका के एक युवक ने कुछ अलग रास्ता चुना है. सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी वह गांव में रहकर खेती और भेड़ पालन कर रहे हैं. 26 साल के नंजुंडस्वामी, हल्लिदिड्डी गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने बी.बी.एम. की पढ़ाई पूरी की है. पुलिस कांस्टेबल की नौकरी भी मिल गई थी. लेकिन पिता मरिस्वामी ने बेटे को गांव छोड़ने नहीं दिया. उनका कहना था, बेटा आंखों के सामने रहे, यही काफी है.
आज 60 भेड़ें हैं
नंजुंडस्वामी ने भी पिता की इच्छा को समझा. उन्होंने तय किया कि वह गांव में रहकर ही सम्मानजनक जीवन जिएंगे. ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने योजना से मिली मदद से एक एकड़ जमीन पर भेड़ शेड बनाया. शुरुआत सिर्फ 2 भेड़ों से की. धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज उनके पास 60 भेड़ें हैं.
नंजुंडस्वामी ने भेड़ पालन के साथ डेयरी व्यवसाय भी शुरू कर दिया है. मनरेगा से 68 हजार रुपये की मदद मिली थी. इसके अलावा उन्होंने 2 लाख रुपये अपनी तरफ से खर्च किए और एक हाईटेक भेड़ शेड तैयार किया. वे यलग और बंडूर नाटी नस्ल की भेड़ें पाल रहे हैं. यलग नस्ल की भेड़ें खासतौर पर रमजान के मौके पर अच्छी कीमत में बिकती हैं. मुस्लिम दोस्त त्योहार से पहले ही भेड़ें बुक कर लेते हैं.
साल भर में लगभग 4 लाख रुपये की आमदनी
नंजुंडस्वामी बताते हैं कि 10 भेड़ों की बिक्री से 1.50 लाख रुपये की कमाई होती है. साल भर में लगभग 4 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है. कभी-कभी तो एक महीने में ही 80 हजार रुपये कमा लेते हैं.
वे अपनी एक एकड़ जमीन में नारियल और चारा भी उगाते हैं. इससे भेड़ों को अच्छा आहार मिलता है और लागत भी कम होती है. आज नंजुंडस्वामी न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बने हैं, बल्कि गांव में एक प्रेरणा भी बन गए हैं. उनके इस जज्बे की गांव के लोग भी खूब तारीफ कर रहे हैं.