FIITJEE: कोचिंग बंद? पैरेंट्स-स्टूडेंट्स न लें टेंशन, एक्सपर्ट ने बताया तरीका
- April 28, 2025
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Ranchi News: हाल ही में देश के कई शहरों में FIITJEE इंस्टीट्यूट अचानक बंद हो गए, जहां IIT की कोचिंग चलती थी. इसके अलावा, दिल्ली में भी पिछले
Ranchi News: हाल ही में देश के कई शहरों में FIITJEE इंस्टीट्यूट अचानक बंद हो गए, जहां IIT की कोचिंग चलती थी. इसके अलावा, दिल्ली में भी पिछले
Ranchi News: हाल ही में देश के कई शहरों में FIITJEE इंस्टीट्यूट अचानक बंद हो गए, जहां IIT की कोचिंग चलती थी. इसके अलावा, दिल्ली में भी पिछले साल कुछ नामी IAS एकेडमी अचानक बंद हो गई. ऐसी स्थिति झारखंड की राजधानी रांची में भी देखने को मिली है. यहां भी फिटजी जैसे इंस्टीट्यूट बंद हो गए, जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों को जोरदार झटका लगा.
कोचिंग इंस्टीट्यूट में बच्चे प्लान बनाकर कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी करते हैं. सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि माता-पिता की मेहनत के लाखों रुपये भी कोचिंग इंस्टीट्यूट में लगते हैं. ऐसे में अचानक उसका बंद होना, किसी बुरे सपने जैसा होता है. रांची के एजुकेशन एक्सपर्ट डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि ऐसी स्थिति में बच्चों को बहुत अधिक पैनिक होने से अच्छा है, बीच का रास्ता निकालें.
कोचिंग पर अधिक निर्भरता सही नहीं
एजुकेशन एक्सपर्ट डॉ. एसएस सिंह बताते हैं कि सबसे पहली बात बच्चों और अभिभावकों को समझनी चाहिए कि कॉम्पिटेटिव एग्जाम के लिए कोचिंग सिर्फ और सिर्फ आपको एनवायरमेंट देती है. इसके अलावा, यह आपके लिए सैंपल क्वेश्चन पेपर सेट करती है. आपका डाउट क्लियर करती है. लेकिन, यह गारंटी नहीं है कि कोचिंग में पढ़ने के बाद आपके बच्चे आईआईटी या फिर आईएएस ऑफिसर बन जाएंगे, क्योंकि यह बच्चे के भीतर की क्वालिटी होती है.
सबकुछ मान लेना गलत…
आगे बताया कि बच्चों की मेहनत, लगन और टैलेंट ही उन्हें किसी भी एग्जाम में क्रैक करने में मदद करता है. आप कोचिंग में दो-तीन घंटे पढ़कर, वह भी 200 बच्चों के साथ, ऑफिसर या आईआईटी नहीं क्रैक कर सकते. ऐसे में इतनी ज्यादा कोचिंग पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए. सेल्फ स्टडी पर 100 प्रतिशत निर्भरता रखिए. हां, डाउट हो तो उसके लिए कोचिंग है, कॉम्पिटेटिव एनवायरमेंट के लिए कोचिंग है. लेकिन, इसे सब कुछ मान लेना गलत है. ऐसे में अचानक जब कोचिंग बंद होती है तो बच्चों के लिए बहुत बड़ा झटका बन जाता है.
झेलनी पड़ती हैं मुश्किलें
इसमें सबसे पहले मुश्किल माता-पिता को झेलनी पड़ती हैं, जो अपनी मेहनत की कमाई दो से चार लाख रुपये एक बार में गवा देते हैं. ऐसे में माता-पिता को सलाह है कि कभी किसी भी कोचिंग इंस्टीट्यूट में एक बार में भारी रकम न दें. आप दो-तीन महीने करके कुछ-कुछ पैसे देते रहें और अगर कोई इंस्टीट्यूट एक बार में सारे पैसे मांग रहा है तो समझ जाइए कि यह गलत है. आप उस कोचिंग इंस्टीट्यूट में अपने बच्चों का दाखिला न कराएं.
विकल्प ढूंढना होगा…
इसके अलावा, बच्चों के सामने समस्या आती है कि अब अचानक से डाउट्स कैसे क्लियर होंगे. चूंकि, अब 18 मई को जेईई एडवांस्ड भी है, तो सैंपल टेस्ट पेपर कहां से मिलेंगे, वे एकदम ब्लैंक हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि अब आगे कुछ भी नहीं है. अब आगे कहां जाएंगे, क्या करेंगे? मानसिक रूप से वे काफी परेशान हो जाते हैं. कई बार तो नींद भी गायब हो जाती है. यह चीज उनकी पढ़ाई में भी देखने को मिलती है. ऐसा करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि इसका विकल्प ढूंढना होगा.
ऐसे दिक्कत हो सकेगी दूर..
विकल्प के तौर पर बच्चे सबसे पहले ऑनलाइन सहारा ले सकते हैं. आज यूट्यूब पर ऐसा कोई टॉपिक नहीं है जिसका डाउट क्लियर नहीं हो सकता. अगर किसी टॉपिक में समस्या है तो आप ऑनलाइन वीडियो के जरिए क्लियर कर सकते हैं. आपके जैसे बच्चे मिलकर एक साथ पढ़ाई कर सकते हैं और कॉम्पिटेटिव एनवायरमेंट बना सकते हैं. कोचिंग में जो टीचर से आप कनेक्ट थे, उनसे एक बार मिलकर या फिर वे कहीं और पढ़ा रहे हैं, तो आप वहां भी जाकर पढ़ सकते हैं. यह कुछ विकल्प हैं जो तुरंत बच्चे कर सकते हैं.
