PAK याद कर वो मंजर, जब भारत ने दिखाई थी औकात, 5 लाख सैनिकों से कंपा दी थी सीमा
- April 27, 2025
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Pahalgam Hamla Operation Brasstacks: सर्दी की धुंध भरी सुबह थी, साल था 1986-87. भारत ने अपनी सीमा पर टैंक और सैनिकों का ऐसा जमावड़ा किया, जैसा शांति के
Pahalgam Hamla Operation Brasstacks: सर्दी की धुंध भरी सुबह थी, साल था 1986-87. भारत ने अपनी सीमा पर टैंक और सैनिकों का ऐसा जमावड़ा किया, जैसा शांति के
Pahalgam Hamla Operation Brasstacks: सर्दी की धुंध भरी सुबह थी, साल था 1986-87. भारत ने अपनी सीमा पर टैंक और सैनिकों का ऐसा जमावड़ा किया, जैसा शांति के समय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कभी नहीं देखा गया था. भारत का ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ पाकिस्तान के लिए एक बिजली का झटका था. इस्लामाबाद अपनी सैन्य ताकत को जुटाने लगा. दुनिया को पता चला कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार बनाने की क्षमता है.
हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 बेगुनाहों की जान ले ली और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया. इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी. तो पाकिस्तान ने शिमला समझौते को रद्द करने की धमकी दी है. हालांकि पाकिस्तान की परमाणु धमकी अभी भी कायम है. इस बीच भारतीय वायुसेना ने राफेल और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ ‘एक्सरसाइज आक्रमण’ शुरू कर दी है. खबरें हैं कि पाकिस्तान ने अपने कुछ लड़ाकू विमानों को दक्षिणी ठिकानों से हटाकर भारत की सीमा के पास उत्तरी इलाकों में तैनात कर दिया है.
पाकिस्तान को आ गए थे पसीने
हालांकि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच पूरी तरह से युद्ध की संभावना कम है. भारत और पाकिस्तान सीमित युद्ध लड़ चुके हैं. ऐसे मौके भी आए हैं जब दोनों देश युद्ध के मुहाने से वापस लौटे हैं. 1987 का ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ ऐसा ही एक पल था. 1987 की सर्दियों में भारत का ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ एक सैन्य अभ्यास था, जिसने पाकिस्तान को पसीने छुड़ा दिए थे. भारत ने अपनी आधी से ज्यादा सेना पाकिस्तान की सीमा के पास तैनात कर दी थी. इसमें 10 डिवीजन और तीन ब्रिगेड शामिल थीं. ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ नाटो के किसी भी अभ्यास से बड़ा था जिसे दुनिया ने देखा था. इसने पाकिस्तान में एक बड़ी सैन्य तैयारी और युद्ध का डर पैदा कर दिया था.
चारों ओर मच गई थी खलबली
मार्च 1987 में ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा था, “‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद शांतिकालीन सैन्य अभ्यास था.” उस समय अब्दुल कादिर खान जो पाकिस्तान के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक थे ने भारतीय पत्रकार कुलदीप नैयर से कहा था, “कोई भी पाकिस्तान को मिटा नहीं सकता और न ही हमें हल्के में ले सकता है. हम यहां रहने के लिए आए हैं और यह साफ कर देना चाहते हैं कि अगर हमारे अस्तित्व पर खतरा आया तो हम परमाणु बम का इस्तेमाल करेंगे.” खान की यह बात आज पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान से मिलती-जुलती लगती है. यह वह समय था जब भारत ने अपनी परमाणु क्षमता घोषित कर दी थी, जबकि पाकिस्तान गुप्त रूप से इस दिशा में काम कर रहा था. दरअसल खान की धमकी एक तरह से यह खुलासा था कि पाकिस्तान ने परमाणु तकनीक हासिल कर ली है.
‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ की वजह क्या थी?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी देश का यह सबसे बड़ा शांतिकालीन सैन्य अभ्यास क्यों किया गया? आइए उस समय के राजनीतिक और भू-राजनीतिक माहौल पर एक नजर डालते हैं ताकि यह समझा जा सके कि भारत के लिए इतने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन क्यों जरूरी माना गया था. जब ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ हुआ, तब भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे. उन्होंने 1984 में अपनी मां और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पदभार संभाला था.
पंजाब में आतंकवाद और कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित अशांति ने भारत की स्थिरता को चुनौती दी थी. पाकिस्तान जो उस समय सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के शासन में था भारत में अशांति पैदा करके “रणनीतिक गहराई” हासिल करना चाहता था. पाकिस्तान की कुख्यात जासूसी एजेंसी ISI और सेना लगातार पंजाब और कश्मीर में हथियारों, पैसे, प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक समर्थन से अशांति फैला रही थी. राजीव गांधी जो आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए उत्सुक थे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को एक स्थिर और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में पेश करना चाहते थे.
कैसा था माहौल?
शीत युद्ध का माहौल भी महत्वपूर्ण था. हालांकि सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका पाकिस्तान का सहयोगी था और उसने उसे भारी मात्रा में हथियार दिए थे, लेकिन वाशिंगटन धीरे-धीरे इस्लामाबाद के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर रहा था. नई दिल्ली भी इसी राह पर थी. दूसरी ओर भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण (स्माइलिंग बुद्धा) पहले ही कर लिया था. और वह पाकिस्तान के साथ तीन युद्ध और चीन के साथ एक युद्ध लड़ने के बाद अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा था. पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ना लाजमी था.
किसकी सोच थी ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’?
दिसंबर 1986 में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी की सोच थी. जनरल सुंदरजी जो भारतीय सेना में बड़े बदलाव कर रहे थे अपनी नई मशीनीकृत युद्ध रणनीतियों को असली मैदान पर परखने के लिए उत्सुक थे. नवंबर के मध्य में भारत के सैन्य संचालन महानिदेशक ने हॉटलाइन उठाई और इस्लामाबाद को खबर दी: ‘भारतीय सैनिक जल्द ही राजस्थान में प्रवेश करेंगे’. ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ एक बड़े पैमाने पर कोर-स्तरीय अभ्यास, अपनी कार्रवाई के लिए तैयार हो रहा था. जिसका अंतिम चरण फरवरी और मार्च में जमीनी युद्धाभ्यास के लिए निर्धारित था, जैसा कि 1987 में ‘इंडिया टुडे’ ने छापी थी.
पाकिस्तान में मच गई थी खलबली
संयोग से पाकिस्तान भी राजस्थान की सीमा के पार बहावलपुर-मारोट सेक्टर में अपना सैन्य अभ्यास ‘सफ-ए-शिकन’ कर रहा था. दो अन्य पाकिस्तानी डिवीजन पास के रावी-चिनाब कॉरिडोर में थीं. पाकिस्तानी समूहों को मध्य दिसंबर तक अपना अभ्यास समाप्त करना था. हालांकि, राजस्थान में बीकानेर और जैसलमेर के बीच रेगिस्तानों में भारतीय सैनिकों और टैंकों की आवाजाही से चिंतित होकर पाकिस्तान सेना ने अपने उत्तरी रिजर्व को ऊपरी चिनाब नहर में स्थानांतरित कर दिया. आधुनिक कंप्यूटर-आधारित युद्ध प्रणालियों से लैस पैदल सेना, टैंक और बख्तरबंद डिवीजनों के साथ, राजस्थान में भारतीय सेना मजबूती से अपनी जगह पर बनी रही. सीमा के उस पार पाकिस्तानी समकक्ष भी उसी तरह की स्थिति में थे.
जनवरी के अंत तक, लगभग 3,40,000 सैनिक सीमा के 400 किलोमीटर के दायरे में मध्य रेगिस्तानों से लेकर उत्तरी पहाड़ों तक, एक-दूसरे के सामने खड़े थे. दोनों तरफ अनजाने में युद्ध छिड़ने के खतरे को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं. रणनीतिक विचारक और इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक एनालिसिस (IDSA) के पूर्व निदेशक पीआर चारी ने 2003 में अपने लेख ‘न्यूक्लियर क्राइसिस, एस्केलेशन कंट्रोल, एंड डेटरेंस इन साउथ एशिया’ में लिखा था, “एक तनावपूर्ण स्थिति विकसित हो गई थी, जिसमें एक मामूली झड़प भी बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती थी… यह उत्तरी राजस्थान में आयोजित किया गया था, जो भविष्य में किसी भी शत्रुता में भारत के लिए सबसे संभावित ‘जंप-ऑफ’ क्षेत्र है…”
अंदर तक डर गया था पाकिस्तान
भारतीय आक्रमण की आशंका से पाकिस्तान वायुसेना ने अपने सभी सैटेलाइट बेस पूरी तरह से चालू रखे. फिर, रावलपिंडी (पाकिस्तान सेना मुख्यालय) ने पास के इलाकों से अपने पैदल सेना और बख्तरबंद रिजर्व को भेजकर उन्हें मजबूत किया. अग्रिम ठिकानों पर पहले और दूसरे स्तर का गोला-बारूद जमा किया गया था, जिसमें 15 दिनों का अतिरिक्त भंडार था. सर्विस लीव रद्द कर दी गई थीं. गांवों से नागरिकों को निकाला गया. लाहौर के पास कुछ पुलों में विध्वंसक खदानें लगाई गईं.
भारत की क्या थी तैयारी
इस बीच वायु रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली अर्धसैनिक यूनिट, मुजाहिद और जानबाज, हाई अलर्ट पर थीं और उन्हें सक्रिय कर दिया गया था. जल्द ही ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ का ध्यान जम्मू और कश्मीर और पंजाब पर केंद्रित हो गया क्योंकि पाकिस्तान ने अपने स्ट्राइक रिजर्व को इन संवेदनशील क्षेत्रों के करीब स्थानांतरित कर दिया था. इसका मुकाबला करने के लिए भारत ने किसी भी अप्रत्याशित हमले को रोकने के लिए अपनी सैन्य स्थिति का विस्तार किया.
पाकिस्तानी सेना ने हरि के बैराज पर पुल को निशाना बनाकर भारत के प्रमुख क्षेत्रों, गुरदासपुर, अमृतसर और फिरोजपुर को अलग करने की धमकी दी थी जिससे जम्मू और कश्मीर सेक्टर तक पहुंच कट सकती थी. IDSA के चारी ने लिखा, “इसके बाद भारत द्वारा सीमा पर अपनी रक्षात्मक स्थिति पर कब्जा करने के लिए सैनिकों की एक बड़ी हवाई लिफ्ट और जमीनी आवाजाही की गई, जिससे तनाव और बढ़ गया.” राजस्थान में सीमा से दूर, जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमाओं पर भी भारतीय और पाकिस्तानी सेनाएं लगभग आमने-सामने थीं, दोनों पक्ष एक तनावपूर्ण गतिरोध बनाए हुए थे.
NYT ने एक अनाम पश्चिमी राजनयिक के हवाले से कहा, “यह भारतीय सेना तीसरी दुनिया की सेना नहीं है… यह एक आधुनिक सेना है, जो किसी भी मिशन के लिए पूरी तरह से सक्षम है, चीनी, कोरियाई या फ्रांसीसी सेना जितनी ही अच्छी है.” इन्हीं बढ़ते तनावों के बीच, ए.क्यू. खान ने खुलासा किया कि पाकिस्तान ने हथियार-ग्रेड यूरेनियम का संवर्धन किया है और परमाणु परीक्षण का अनुकरण कर सकता है. चेतावनी देते हुए कहा, “कोई भी पाकिस्तान को मिटा नहीं सकता और न ही हमें हल्के में ले सकता… अगर जरूरी हुआ तो हम बम का इस्तेमाल करेंगे.”
बाद में अपने बयान से पटल गए थे ए.क्यू. खान
हालांकि बाद में ए.क्यू. खान जिन्हें पाकिस्तान के परमाणु बम का जनक माना जाता है, ने अपना रुख नरम करते हुए कहा कि उनके बयानों को गलत समझा गया था. सैन्य विद्वान और लेखक रवि रिख्ये ने अपनी पुस्तक ‘वॉर दैट नेवर वाज़’ में लिखा है, “1986-87 के अभ्यास ने पाकिस्तान पर दबाव डालने, उसे भारत की श्रेष्ठ शक्ति के प्रति उसकी कमजोरी की याद दिलाने का एक अनूठा अवसर प्रस्तुत किया. अंतिम लक्ष्य: अलगाववादियों का समर्थन करने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करना, चाहे वह सीमित ही क्यों न हो.”
भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ पर क्या कहा था
हालांकि, सेना प्रमुख सुंदरजी ने जोर देकर कहा कि ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ “पूरी तरह से प्रशिक्षण उद्देश्यों” के लिए था और इसका उद्देश्य भारत की नई मशीनीकृत युद्ध रणनीति को मान्य करना था. सुंदरजी ने पाकिस्तानी आशंकाओं को व्यामोह बताते हुए कहा, “यह एक प्रशिक्षण अभ्यास था, है और हमेशा रहेगा.” लेकिन पाकिस्तान के लिए, भारी संरचनाओं को अपनी सीमाओं के करीब आते देखना, युद्ध की प्रस्तावना जैसा लग रहा था.
कैसे तनाव हुआ कम?
भारत-पाकिस्तान की इस सैन्य तैयारी में संभावित पूर्ण पैमाने पर युद्ध के सभी तत्व मौजूद थे, लेकिन अंततः राजनयिक हस्तक्षेप के माध्यम से इसे कम कर दिया गया. मार्च 1987 में भारत और पाकिस्तान कश्मीर क्षेत्र से 1,50,000 सैनिकों को वापस बुलाने के लिए एक समझौते पर पहुंचे, जिसके बाद उसी महीने राजस्थान और दक्षिणी पंजाब के रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य उपस्थिति को कम करने के लिए एक दूसरा समझौता हुआ.
भारत ने लगातार पाकिस्तान को आश्वासन दिया कि उकसावे का कोई कारण नहीं है. हालांकि, मार्च 1987 में भारतीय सेना ने 1,50,000 सैनिकों के साथ ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ का अंतिम चरण शुरू किया.
जनरल सुंदरजी ने NYT अखबार को बताया, “यह एक प्रशिक्षण अभ्यास था, है और हमेशा रहेगा.”
हालांकि, प्रधानमंत्री राजीव गांधी का संकट के दौरान विदेश सचिव ए.पी. वेंकटेश्वरन को सार्वजनिक रूप से बर्खास्त करने के फैसले ने अनिश्चितता की भावना को और गहरा कर दिया और भौहें चढ़ा दीं. वी.पी. सिंह जो बाद में प्रधानमंत्री बने उन्हें देश का नया रक्षा मंत्री बनाया गया.
हालांकि, भारतीय सरकार और सेना के आधिकारिक रुख का खंडन करते हुए कि ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ केवल एक नियमित सैन्य अभ्यास था, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) पी.एन. हून, जो उस समय पश्चिमी कमान के कमांडर-इन-चीफ थे, ने दावा किया कि सेना वास्तव में पाकिस्तान के साथ युद्ध की तैयारी कर रही थी.
लेफ्टिनेंट जनरल हून ने 2015 में अपनी पुस्तक ‘द अनटोल्ड ट्रुथ’ में लिखा, “‘ब्रासटैक्स’ कोई सैन्य अभ्यास नहीं था; यह पाकिस्तान के साथ चौथे युद्ध के लिए एक स्थिति बनाने की योजना थी. और इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री, राजीव गांधी, को युद्ध की इन योजनाओं के बारे में पता नहीं था.”
रवि रिख्ये ने अपनी पुस्तक ‘वॉर दैट नेवर वाज़’ में लिखा है, “मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री, अरुण सिंह (तत्कालीन कनिष्ठ रक्षा मंत्री), नटवर सिंह (प्रधानमंत्री के विदेश नीति सलाहकार), रॉ और जनरल सुंदरजी, सभी अपने-अपने कारणों से, पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करवाना चाहते थे.”
लेफ्टिनेंट जनरल हून ने यह कहते हुए जवाब दिया कि अरुण सिंह और जनरल सुंदरजी ने प्रधानमंत्री को कथित तौर पर सूचित किए बिना “युद्ध” क्यों छेड़ा, “यह एक शक्ति का खेल था. सुंदरजी फील्ड मार्शल बनना चाहते थे और अरुण सिंह प्रधानमंत्री बनना चाहते थे.”
देश में था संवेदनशील माहौल
दावे और प्रति-दावे हैं और इस बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़े को समझने के लिए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद रखना होगा. ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ ऐसे समय में हुआ जब पाकिस्तान खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकवादियों को हथियार दे रहा था. यह वह समय भी था जब भारत जानता था कि पाकिस्तान गुप्त रूप से परमाणु एजेंडा चला रहा है. ‘ऑपरेशन ब्रासटैक्स’ का कारण जो भी रहा हो, भारी सैन्य जमावड़े ने पाकिस्तान को भारत की सैन्य श्रेष्ठता और हमला करने की तत्परता की एक ठंडी याद दिलाई जिससे इस्लामाबाद को अपनी रणनीतिक मान्यताओं पर पुनर्विचार करने और अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को सार्वजनिक रूप से सामने आने से पहले ही तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
