मुजफ्फरनगर. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर देशभर में गुस्सा देखने को मिल रहा है. इस हमले में नाम पूछकर गोली मारने को लेकर मुस्लिम समुदाय में भी खासा नाराजगी देखने को मिल रही है. बुधवार शाम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में पैगाम-ए-इंसानियत मुस्लिम सामाजिक संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग सड़क पर उतरे. हाथों में आतंकवाद और पाकिस्तान के विरोध में तख्तियां लेकर कैंडल मार्च निकाला. मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान गुस्साए मुस्लिम समाज के लोगों ने आरोपी आतंकवादियों और उनकी मदद करने वालों के लिए कड़ी सजा की मांग की.
मुस्लिम सामाजिक संस्था पैगाम-ए-इंसानियत के राष्ट्रीय अध्यक्ष आसिफ राही ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘देखिए पहलगाम की जो घटना हुई है, उसमें निर्दोष लोगों की जान गई है. 27 लोगों की श्रद्धांजलि देने के लिए पैगाम इंसानियत ने कई सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कैंडल मार्च निकाला है. आतंकवाद के विरोध में कैंडल मार्च निकाला गया है इसलिए हम सब लोग यहां इकट्ठा हुए थे. पूरे देश की नजर इस समय सरकार की तरफ है.’
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उन्होंने आगे कहा, ‘पूरा देश चाहता है कि ऐसी सजा उन आतंकवादियों को दी जाए, जो नजीर बन जाए. ऐसी नजीर दी जाए जिसे पूरी दुनिया देखे कि हिंदुस्तान में निर्दोष लोगों की जान लेने वालों को भारत सरकार ने कितनी बड़ी सजा दी है.’
इधर, केंद्र सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए 5 कड़े फैसले लिए हैं. पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने इस जघन्य हमले की निंदा की. पाकिस्तान को लेकर पांच बड़े फैसले लिए. पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे.
भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द कर दिया गया है और 48 घंटे के भीतर उन्हें देश छोड़ने के आदेश दिए गए हैं. भारत में पाकिस्तानी दूतावास को बंद कर दिया गया है. 1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है. जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय रूप से सीमापार आतंकवाद को अपना समर्थन बंद नहीं कर देता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी. अटारी बॉर्डर को भी तत्काल प्रभाव से बंद करने का फैसला किया गया है.