हैदराबाद: एक ऐसा शहर जिसे आईटी सेक्टर का गढ़ माना जाता है, अगर कहा जाए कि उस शहर का मूड ठीक नहीं है, तो विश्वास करना मुश्किल होगा. लेकिन, वाशिंगटन डीसी स्थित सैपियन लैब्स द्वारा प्रकाशित ‘मेंटल स्टेट ऑफ द वर्ल्ड रिपोर्ट 2024’ में मानसिक स्वास्थ्य के मामले में हैदराबाद को भारत के सबसे निचले मेट्रो शहरों में स्थान दिया गया है. इस अध्ययन के अनुसार, हैदराबाद के युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति में है.
क्या है रिपोर्ट?
वाशिंगटन डीसी में स्थित सैपियन लैब्स ने मानसिक स्वास्थ्य पर एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें हैदराबाद शहर ने मानसिक स्वास्थ्य भागफल (MHQ) पैमाने पर सिर्फ़ 58.3 अंक हासिल किए हैं. यह अंक औसत अंक 63 से काफ़ी कम हैं. वहीं, दिल्ली 54.4 अंक के साथ दूसरे स्थान पर है. 18 से 55+ आयु वर्ग के 75,000 से ज़्यादा लोगों के जवाबों पर आधारित यह रिपोर्ट एक गंभीर तस्वीर पेश करती है. MHQ पैमाना मानसिक स्वास्थ्य को ‘डिस्ट्रेस्ड’ से लेकर ‘थ्राइविंग’ तक कैटेगरी करता है. हैदराबाद का औसत ‘स्थायी’ और ‘प्रबंधन’ श्रेणियों के बीच आता है.
32 प्रतिशत लोग संघर्ष की श्रेणी में
सैपियन लैब्स के निदेशक शैलेंद्र स्वामीनाथन के अनुसार, 32 प्रतिशत हैदराबादी लोग ‘संघर्षरत’ श्रेणी में आते हैं, जो खराब भावनात्मक और तनावपूर्ण रिश्तों और कम मानसिक प्रदर्शन की पहचान है. इसमें युवा और वयस्क सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, जिनकी संख्या चिंताजनक हैं. रिपोर्ट में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य संकट के कुछ प्रमुख कारण भी बताए गए हैं.
आखिर क्या है कारण
रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक बंधनों का टूटना और स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल सबसे बड़ा कारण है. स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग कम उम्र में उदासी, चिंता, और आक्रामकता जैसी समस्याएं पैदा कर रहा है. इसके अलावा, स्मार्टफोन के संपर्क में आने से नींद में खलल पड़ता है, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन शिकारियों जैसी हानिकारक सामग्री के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है.
स्मार्टफोन की आदत से खानपान पर भी असर पड़ता है, जिससे स्वास्थ पर नकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कीटनाशक और माइक्रोप्लास्टिक, जो अब आम तौर पर भोजन और पानी में पाए जाते हैं, मस्तिष्क के विकास के लिए खतरे पैदा करते हैं, और खासकर बच्चों के लिए यह ठीक नहीं है.
इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि हैदराबाद में मानसिक स्वास्थ्य के मामलों में गंभीर गिरावट देखी जा रही है, और इसके कारणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.