February 20, 2026
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Explainer: डार्क मैटर के बिना ये गैलेक्सी आखिर टिकी कैसे है? वैज्ञानिक भी दंग

  • April 20, 2025
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नई दिल्ली: अब तक यही माना जाता था कि डार्क मैटर ही वो गोंद है जो ब्रह्मांड को जोड़े रखता है. गैलेक्सी हो या क्लस्टर, सब कुछ उसी

Explainer: डार्क मैटर के बिना ये गैलेक्सी आखिर टिकी कैसे है? वैज्ञानिक भी दंग

नई दिल्ली: अब तक यही माना जाता था कि डार्क मैटर ही वो गोंद है जो ब्रह्मांड को जोड़े रखता है. गैलेक्सी हो या क्लस्टर, सब कुछ उसी के गुरुत्वाकर्षण से संभला हुआ है. लेकिन अब एक नई गैलेक्सी ने इस भरोसे को ही झटका दे दिया है. इसका नाम है, FCC 224. ये गैलेक्सी पहली बार 2024 में देखी गई थी. ये कोई आम गैलेक्सी नहीं, बल्कि ड्वार्फ गैलेक्सी है. आकार में छोटी, मगर दिलचस्प इतनी कि एस्ट्रोनॉमर्स के बीच चर्चा का केंद्र बन गई. क्योंकि इसमें डार्क मैटर की मौजूदगी के कोई ठोस संकेत नहीं हैं. हां, इसमें दर्जनभर चमकीले स्टार क्लस्टर्स जरूर हैं, जो आमतौर पर बड़ी और भारी डार्क मैटर वाली गैलेक्सियों में दिखते हैं. लेकिन यहां कोई डार्क मैटर नहीं.

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हमसे कितनी दूर है यह गैलेक्सी?

FCC 224 फॉरनैक्स क्लस्टर के किनारे मौजूद है, पृथ्वी से करीब 65 मिलियन लाइट ईयर्स दूर. इसकी बनावट और लोकेशन दोनों ही इसे अब तक खोजी गई डार्क मैटर रहित गैलेक्सियों से अलग बनाते हैं. यानी यह कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता. शायद ऐसी गैलेक्सियों की एक नई कैटेगरी ही हमारे सामने खुल रही है.

इस गैलेक्सी पर रिसर्च की कमान ऑस्ट्रेलिया की मारिया बज्जो और उनकी टीम ने संभाली. उन्होंने हवाई की केक ऑब्ज़र्वेटरी से डेटा लिया और इसके स्टार क्लस्टर्स की मूवमेंट को ट्रैक किया. जो पता चला, वो हैरान कर देने वाला था. इन क्लस्टर्स की रफ्तार बहुत धीमी है. यानी इन पर वैसा गुरुत्वाकर्षण नहीं है जैसा डार्क मैटर के होने पर होता. सीधे शब्दों में कहें तो FCC 224 में डार्क मैटर नहीं है.

फिर ये गैलेक्सी टिक कैसे रही है?

इसका एक जवाब है कोलिजन थ्योरी. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के खगोलविद यिमेंग टांग और उनकी टीम ने इस पर काम किया है. उन्होंने FCC 224 की तुलना दो और गैलेक्सियों – DF2 और DF4 – से की, जो पहले से ही डार्क मैटर फ्री मानी जाती हैं. ये दोनों NGC 1052 ग्रुप में हैं. माना जाता है कि किसी जमाने में दो गैस-समृद्ध गैलेक्सियों की तेज टक्कर में ये बनी थीं. टक्कर में गैस डार्क मैटर से अलग हो गई, और उसी गैस से नई गैलेक्सियां बनीं, बिना डार्क मैटर के.

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हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई आकाशगंगा FCC 224 की तस्वीर. (Photo: NASA/STScI)

FCC 224 भी शायद ऐसे ही किसी टक्कर का नतीजा है. और इसकी एक ‘जुड़वां’ गैलेक्सी भी है FCC 240. साइज, शेप और ऑरिएंटेशन… सबकुछ मेल खाता है. अगर आगे की ऑब्ज़र्वेशन इस समानता की पुष्टि करते हैं, तो ये कोलिजन थ्योरी और भी मजबूत हो जाएगी.

हालांकि एक और संभावना है कि FCC 224 में कभी बेहद तीव्र स्टार फॉर्मेशन हुआ हो. ऐसे में ओवरमैसिव स्टार क्लस्टर्स ने इतनी एनर्जी छोड़ी हो कि डार्क मैटर को ही बाहर निकाल दिया हो. यानी इसकी खुद की ही शक्तियों ने डार्क मैटर को भगा दिया.

क्या बिग बैंग थ्योरी गलत है?

अब असली बात ये है कि FCC 224 जैसे उदाहरण अगर और सामने आते हैं, तो ब्रह्मांड की हमारी समझ में बड़ा बदलाव आ सकता है. डार्क मैटर पर बने मॉडल्स को दोबारा जांचना पड़ेगा. बिग बैंग थ्योरी को भी नए सवालों का सामना करना पड़ेगा. क्योंकि अगर डार्क मैटर के बिना भी गैलेक्सी स्थिर रह सकती है, तो फिर वो कौन सी ताकत है जो इन्हें बांधे रखती है?

मारिया बज्जो खुद मानती हैं कि FCC 224 जैसी गैलेक्सियां इस दिशा में रिसर्च के लिए बेहद अहम हैं. जितने ज्यादा ऐसे उदाहरण मिलेंगे, उतनी गहराई से हम समझ पाएंगे कि आखिर डार्क मैटर वाकई कितना जरूरी है और कितना नहीं.

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