February 20, 2026
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रानीपुर टाइगर रिजर्व के जानवरों की अनोखे तरीके से बुझेगी प्यास..जानें कैसे

  • April 20, 2025
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Last Updated:April 20, 2025, 10:28 IST Chitrakoot News: वन विभाग के द्वारा गर्मी के मौसम में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए रानीपुर टाइगर रिजर्व के कोर

रानीपुर टाइगर रिजर्व के जानवरों की अनोखे तरीके से बुझेगी प्यास..जानें कैसे

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Chitrakoot News: वन विभाग के द्वारा गर्मी के मौसम में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए रानीपुर टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में 10 जलकुंड तैयार किए गए हैं.इनमें पांच कच्चे और पांच पक्के जलकुंड शामिल किए है. पक्के…और पढ़ें

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पानी

पानी का कुंड

हाइलाइट्स

  • रानीपुर टाइगर रिजर्व में 10 जलकुंड बनाए गए
  • पक्के जलकुंडों में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाए गए
  • जलकुंडों से वन्य जीवों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है

चित्रकूट: गर्मी के दस्तक के साथ बुंदेलखंड के पठारी इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है. आसमान से बरसती आग जैसी धूप ने जहां इंसानों का जीना मुश्किल कर दिया है. वहीं जंगलों में वन्य जीवों के लिए भी पानी का संकट खड़ा हो रहा है. गर्म हवाओं और भीषण तापमान के कारण जंगल के पुराने तालाब, कुआं और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं, हालत ये है कि रानीपुर टाइगर रिजर्व होने के कारण यहां अब जानवरों की संख्या भी ज्यादा होने लगी है और प्यासे जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए जंगल से भटक कर बस्तियों तक आने लगे थे. लेकिन इस बार पाठा क्षेत्र में जानवरों के लिए स्थिति बदलती हुई नजर आ रही है. क्योंकि रानीपुर टाइगर रिजर्व ने अपने वन्य जीवों के लिए बेहतरीन इंतजाम किए हैं. अब न तो कोई जानवर प्यासा रहेगा और न ही वह अब पानी के लिए इंसानी बस्तियों की ओर भटकेगा. दरअसल वन विभाग ने जानवरों की प्यास बुझाने के लिए सौर ऊर्जा का सहारा लिया है.

सौर ऊर्जा से चल रहे पंप
आपको बता दें कि वन विभाग के द्वारा गर्मी के मौसम में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए रानीपुर टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में 10 जलकुंड तैयार किए गए हैं. इनमें पांच कच्चे और पांच पक्के जलकुंड शामिल किए है. पक्के जलकुंडों में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाए गए हैं, जो दिनभर पानी भरते रहते हैं. वहीं कच्चे जलाशय ग्रेविटी सिस्टम और प्राकृतिक स्रोतों के पास बनाए गए हैं. इन जलकुंडों की खासियत ये है कि ये आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे पानी की सतत उपलब्धता बनी रहती है और जंगल से आने वाले जानवरों को पानी पीने में कोई समस्या भी नहीं आएगी.

उप निदेशक ने दी जानकारी 
वहीं वन विभाग के उपनिदेशक प्रत्युष कुमार कटियार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया, कि इन वाटर होल्स का फायदा केवल बड़े वन्य जीव को ही नहीं, बल्कि मछलियां, कछुए और पक्षियों जैसे जलीय प्रजातियां भी उठा रही हैं. इन जलकुंडों की वजह से वन्य जीवों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा जलकुंड मानिकपुर प्रथम और मारकुंडी प्रथम रेंज में बनाए गए हैं. यहां बनाए गए 23 मीटर चौड़े जलकुंड जानवरों के लिए संजीवनी साबित हो रहे हैं.

पुराने जलकुंडों की भी हो रही लगातार निगरानी
उप निदेशक ने आगे की जानकारी में बताया, कि इन जलकुंडों में सालभर पानी की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए पहले से बने पुराने जलकुंडों की भी लगातार निगरानी की जा रही है. किसी भी जलकुंड में पानी की कमी न हो, इसके लिए सभी रेंजरों को निर्देश दिए गए हैं. इस साल गर्मी में 10 नए जलकुंड बनाए गए हैं, जिससे अब किसी भी वन्य जीव को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. उन्होंने लोगो से अपील की है कि सरकारी दफ्तर हो या घर गर्मी के मौसम में सभी लोगों को अपने घर के बाहर एक छोटे से बर्तन में पानी भरकर रखना चाहिए. ताकि आने वाले पंछी अपनी प्यास बुझा पाएं.

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