मैसूर: आज कल किसान खेती में कुछ न कुछ नया करते रहते हैं. कृषि में नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण मैसूर से सामने आया है. मैसूर जिले के एच.डी.कोटे तालुका के पडवकोटे गांव के किसान रामकृष्ण ने ऑस्ट्रेलिया के बीजरहित नींबू की किस्म को मैसूर की मिट्टी में उगाकर लाखों की कमाई की है. बता दें कि अपनी 40 एकड़ जमीन में 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद, रामकृष्ण ने इस किस्म को सफलतापूर्वक उगाया है और स्थानीय किसानों के साथ इस तकनीक को शेयर कर रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया से मैसूर तक नींबू की किस्म
बता दें कि रामकृष्ण, बी.एस.सी. स्नातक हैं और कृषि विभाग में कृषि अधिकारी और सहायक निदेशक के रूप में सेवा दे चुके हैं. कृषि में रुचि रखने वाले रामकृष्ण ने ऑस्ट्रेलिया में कृषि अनुसंधान किया और वहां की ‘पर्शियन सीडलेस’ नींबू की किस्म को भारत लाए. मैसूर के वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए उन्होंने 10 साल तक परीक्षण किया. अब, उनके 40 एकड़ जमीन में 7,000 से अधिक पौधे सालभर नींबू फल देते हैं.
कमाई के साथ किसानों को जानकारी
बता दें कि इस नींबू की एक पौधा साल में 100 किलो तक फल देता है. एक किलो नींबू 20 से 70 रुपये में मैसूर और बेंगलुरु के बाजारों में बिकता है. खर्च निकालकर, रामकृष्ण हर महीने 5 से 6 लाख रुपये की आय कमा रहे हैं. ये पौधे एक साल के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं, जो किसानों के लिए आकर्षक विकल्प है.
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विशेषताएं क्या हैं?
इस बीजरहित नींबू में सामान्य नींबू से तीन गुना ज्यादा रस होता है और कड़वाहट कम होती है. जूस बनाने के लिए यह बेहतरीन है और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक नहीं है. रामकृष्ण रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते, बल्कि जीवामृत तैयार कर उपयोग करते हैं. सड़े हुए नींबू को संसाधित कर पौधों पर छिड़काव करते हैं, जिससे बीमारियों को रोका जा सकता है. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और अधिक फल देते हैं.