March 14, 2026
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आंधी पानी में बचाने आम के टिकोले तो अपनाएं यह टिप्स, इस घोल का करें छिड़काव

  • April 16, 2025
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Last Updated:April 16, 2025, 16:14 IST आम के टिकोले झड़ने का कारण हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है. विशेषज्ञ अभिषेक राणा के अनुसार, अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड का सही

आंधी पानी में बचाने आम के टिकोले तो अपनाएं यह टिप्स, इस घोल का करें छिड़काव

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आम के टिकोले झड़ने का कारण हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है. विशेषज्ञ अभिषेक राणा के अनुसार, अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड का सही मात्रा में छिड़काव करने से इसे रोका जा सकता है.

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वहीं दूसरी ओर छोटी अवस्था में ही पेड़ से फल टूट कर भी गिरने लगते हैं, ऐसे में ये किसानों को लिए गंभीर समस्या है, जिसका समाधान समय पर किया जाना बेहतर है, ऐसे में एक्सपर्ट से जानते हैं, इन समस्याओं से कैसे बचा जा सकता है.

हाइलाइट्स

  • आम के टिकोले झड़ने का कारण हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है.
  • अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड का छिड़काव करें.
  • शाम में छिड़काव करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं.

गोपालगंज. यदि आपने आम का पेड़ लगाया है और उस पर भारी मात्रा में टिकोले आए हैं, तो इसका ख्याल रखना भी जरूरी है. कई बार ऐसा होता है कि बिना तेज आंधी के भी अपने आप टिकोले झड़ने लगते हैं. अपने आप आम के टिकोले के झड़ने का एक कारण हार्मोनल इंबैलेंस भी होता है. आम के पेड़ में हार्मोनल के असंतुलित स्राव के कारण भी टिकोले झड़ने लगते हैं.

यदि इसके बचाव के लिए उपयुक्त दवाई की जानकारी और उसके छिड़काव करने का तरीका किसानों को पता हो तो तो टिकोले को झड़ने को रोका जा सकता है.

लोकल-18 ने इस समस्या को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से बात की, तो वहां कीट विशेषज्ञ वैज्ञानिक अभिषेक राणा ने बताया कि हार्मोनल इंबैलेंस के कारण आम के टिकोले झड़ने लगते हैं. ऐसी स्थिति के लिए एक दवाई है जिसका नाम है अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड. इसका छिड़काव कर आम के टिकोले को झड़ने से रोका जा सकता है, लेकिन जरूरी यह है कि किसानों को इस दवाई की मात्रा और छिड़काव करने का सही तरीका पता होना चाहिए.

4 लीटर पानी में मिलाएं 1 एमएल दवाई, शाम में करें छिड़का
कीट विशेषज्ञ वैज्ञानिक अभिषेक राणा बताते हैं कि अल्फा नैप्थलीन एसिटिक एसिड का एक एमएल पांच लीटर पानी में मिलाकर आम के पौधों पर छिड़काव करना चाहिए. यह दवाई का छिड़काव शाम में हो तो सबसे बेहतर होगा. क्योंकि शाम में छिड़काव करने से इसका प्रभाव अधिक देर तक आम के पौधों पर रहेगा. वहीं जब सुबह छिड़काव करते हैं, तो दिन के धूप में इसका असर समाप्त हो जाता है.

बेवजह ना छिड़के दवाई, विशेषज्ञ से लें सलाह
वैज्ञानिक  बताते हैं कि अगर आम के टिकोले सुरक्षित हैं तो इन दवाओं छिड़काव ना करें, क्योंकि इसदवा का बेवजह छिड़काव घातक भी हो सकता है. अगर बड़ी मात्रा में आम के पौधे झड़ने लगे तो ही इस दवा का छिड़काव किया जाए. इससे पहले किसी भी विशेषज्ञ से सलाह ले लेना उचित है.

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