बाघों से हाउसफुल हुआ कॉर्बेट पार्क, तो पहाड़ों पर पलायन करने लगे टाइगर
- April 13, 2025
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Last Updated:April 13, 2025, 23:56 IST Corbett Tiger Reserve: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 1288.34 वर्ग किमी है. आमतौर पर एक नर बाघ को अपने लिए 40-60
Last Updated:April 13, 2025, 23:56 IST Corbett Tiger Reserve: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 1288.34 वर्ग किमी है. आमतौर पर एक नर बाघ को अपने लिए 40-60
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रामनगर. भारत के सबसे प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में अब बाघों की संख्या उसकी धारण क्षमता से कहीं आगे निकल चुकी है. कभी बाघों की शरणस्थली माने जाने वाले इस रिजर्व में अब उनके लिए जगह की कमी संकट का कारण बन रही है. भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा कराए जा रहे अध्ययन के प्रारंभिक निष्कर्षों ने साफ कर दिया है कि कॉर्बेट अब और अधिक बाघों का भार सहन नहीं कर सकता. 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 560 बाघ हैं, जिनमें से 260 से ज्यादा बाघ अकेले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मौजूद हैं.
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 1288.34 वर्ग किलोमीटर है. आमतौर पर एक नर बाघ को 40-60 वर्ग किलोमीटर का इलाका चाहिए होता है लेकिन कॉर्बेट में कई बाघ अब केवल 5 से 10 वर्ग किलोमीटर में सिमटकर रहने को मजबूर हैं. इससे न केवल आपसी संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भी गंभीर होता जा रहा है.
कॉर्बेट पार्क की क्षमता पर अध्ययन
कॉर्बेट से सटे तराई पश्चिम, रामनगर और लैंसडाउन डिवीजनों में भी बाघों की उपस्थिति बढ़ी है. उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव वार्डन रंजन मिश्रा के अनुसार, यह विषय अत्यंत संवेदनशील है और इसी को ध्यान में रखते हुए WII के जरिए कॉर्बेट की केयरिंग कैपेसिटी पर विशेष अध्ययन शुरू किया गया है. अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी. बाघों के पहाड़ी जिलों जैसे पौड़ी, बागेश्वर और टिहरी में पहुंचने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जो इस पलायन का स्पष्ट संकेत देती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पलायन ओवर-कैपेसिटी के कारण हो रहा है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है.
वन्यजीव प्रेमियों की राय
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कॉर्बेट की सीमाएं स्थिर हैं लेकिन बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न केवल इनब्रीडिंग का खतरा बढ़ रहा है बल्कि वन्यजीव-मानव संघर्ष भी. ऐसे में बाघों का पुनर्वास, नए कॉरिडोर और अतिरिक्त टाइगर रिजर्व की दिशा में ठोस पहल जरूरी हो गई है. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, जिसने कभी बाघों के संरक्षण की नींव रखी थी, अब उसी बोझ से जूझ रहा है. वक्त है कि हम संतुलित संरक्षण की ओर ठोस कदम बढ़ाएं.
