बीड: अगर मन में जिद्द हो और लक्ष्य पक्का हो तो कोई भी चीज़ असंभव नहीं होती. बीड के गन्ना मजदूर के बेटे ने यही साबित कर दिखाया है. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के चरित्र से प्रेरणा मिली और युवराज ढगे ने गायन शुरू किया. अब माजलगांव तालुका के गायक युवराज ढगे अपनी प्रभावी गायन शैली से पूरे महाराष्ट्र में छा गए हैं. उनके इस सफर के बारे में लोकल18 के माध्यम से जानें.
भीम गीतों से महाराष्ट्र की आवाज
युवराज ढगे ने न केवल अपनी कला के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है, बल्कि समाज जागरूकता के लिए भी गायन का उपयोग किया है. उन्होंने भीम गीतों के माध्यम से कई बार दलित, पिछड़े वर्ग में जनजागृति की है. उनके गानों में सामाजिक संदेश होता है, अन्याय के खिलाफ आवाज होती है और एक सशक्त विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास होता है. इसलिए उनके कार्यक्रमों को ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष प्रतिक्रिया मिलती है.
कई प्रतियोगिताएं जीतीं
बता दें कि युवराज ढगे ने कई जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर कई पुरस्कार जीते हैं. उनकी आवाज की ताकत, शब्दों की संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण वे जल्द ही श्रोताओं के दिलों में जगह बना लेते हैं. उन्होंने शिवजयंती, भीमजयंती जैसे महान विभूतियों के कार्यक्रमों में अपने गायन से ऐतिहासिक घटनाओं की पुनरावृत्ति की है.
लोगों को गाना पसंद आता है
लोकल 18 से बात करते हुए युवराज ढगे ने कहा कि मुझे बचपन से ही गानों का शौक था. इसलिए मैं कई लोगों के गाने, लोकगीत, भीमगीत सुनता था. आगे चलकर जहां भी मौका मिला, गाना शुरू किया. लोगों को मेरा गाना पसंद आने लगा और आज प्रशंसकों से बहुत अच्छा समर्थन मिल रहा है. सफर संघर्ष का रहा, लेकिन कला के माध्यम से लोगों तक पहुंच सका. इसका आनंद है.