बेटे के 8वीं में 95% मार्क्स, अब एडमिशन के लिए भटक रहा पिता
- April 13, 2025
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Last Updated:April 13, 2025, 13:53 IST CBSE Schools : सीबीएसई ने नवंबर 2024 में दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल की संबद्धता खत्म कर दी थी. इसमें पढ़ने वाले
Last Updated:April 13, 2025, 13:53 IST CBSE Schools : सीबीएसई ने नवंबर 2024 में दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल की संबद्धता खत्म कर दी थी. इसमें पढ़ने वाले
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CBSE Schools : सीबीएसई की कार्रवाई से 205 बच्चे प्रभावित हैं.
हाइलाइट्स
CBSE Schools : सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध रहे दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ने वाले 200 से अधिक बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है. सीबीएसई ने 4 नवंबर 2024 को ईस्ट ऑफ कैलास में संचालित डेजी डेल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की सीनियर सेकेंडरी स्कूल का प्रोविजनल संबद्धता वापस ले ली थी. सीबीएसई के नियमों का पालन न करने के कारण हुए इस एक्शन से सीधे तौर पर 205 छात्र प्रभावित हुए. जिसमें 96 छात्र नौवीं और 19 छात्र 11वीं में पढ़ने वाले थे.
जिसके बाद आठवीं के एक छात्र के पिता सोनू ने पिछले महीने अधिवक्ता रुषभ अग्रवाल की मदद से दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसके बाद 12 मार्च को हाईकोर्ट ने सीबीएसई को निर्देश दिया कि प्रभावित छात्रों को समकक्ष स्तर के स्कूल में दाखिला मिले. लेकिन निर्देश के एक महीने बाद भी लोग भटक रहे हैं. जमरुदपुर निवासी सोनू ऐप बेस्ड प्लेटफॉर्म पर ड्राइवर का काम करते हैं. अब वह अपना काम छोड़कर बच्चे के नौवीं में एडमिशन के लिए स्कूल दर स्कूल जाकर फॉर्म भर रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार,सोनू ने बताया, “मेरे बेटे ने आठवीं कक्षा में 93% अंक हासिल किए हैं. वह हमेशा अपनी क्लास में टॉप 5 छात्रों में से एक रहा है. फर भी मैं उसे दाखिला दिलाने के लिए स्कूल तलाशन के लिए संघर्ष कर रहा हूं.”
स्कूल-दर स्कूल भटक रहे माता-पिता
सीबीएसई की ओर से की गई कार्रवाई से सोनू जैसे कई ऐसे माता-पिता सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिनके बच्चों को EWS कोटे के तहत दाखिला दिया गया था. सोनू की तरह वर्षा ने भी इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनका भी बेटा आठवीं कक्षा में डेजी डेल्स में पढ़ रहा था. उन्होंने चार स्कूलों में फॉर्म भरे और अभी भी जवाब का इंतजार है. दो स्कूलों की फीस बहुत ज्यादा है, फिर भी हताश होकर आवेदन किया.
नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है. लेकिन जमरुदपुर की रहने वाली सविता भी सोनू और वर्षा की तरह अपनी बेटी के बारे में चिंतित हैं. उनकी बेटी का भी नौवीं में एडमिशन EWS कोटे से हुआ था. उनके पति ब्लॉक पेंटर हैं और घर का खर्च चलाने भर की कमाई मुश्किल से कर पाते हैं.
