Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए अधिक प्रभावी और लाभकारी होती जा रही है. इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान की भरपाई करना है. वर्तमान में मौसम के अचानक बदलने, चक्रवात, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश जैसी आपदाओं के चलते यह योजना किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य कर रही है.
किसानों को हुआ फसलों का नुकसान
जिले में हाल ही में बेमौसम बारिश और चक्रवात के कारण कई किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है. कृषि विभाग के उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि इस योजना के तहत ओलावृष्टि, जलभराव, आकाशीय बिजली, चक्रवात और चक्रवर्ती बारिश से होने वाली क्षति को बीमा कवर में शामिल किया गया है. अगर फसल की कटाई के बाद उसे सुखाने के लिए रखा गया हो और उस दौरान भी नुकसान होता है, तो वह भी मुआवजे के अंतर्गत आता है. सरकार सुनिश्चित कर रही है कि ऐसे समय में किसानों को राहत मिले.
किसान टोल फ्री नंबर
अगर किसी किसान की बीमित फसल को नुकसान होता है तो उसे 72 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज करानी होगी. शिकायत दर्ज करने के लिए किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं और अपने विकासखंड के कृषि कार्यालय या उप कृषि निदेशक कार्यालय में आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं. इससे बीमा कंपनी और कृषि विभाग समय पर सर्वेक्षण कर वास्तविक नुकसान का आंकलन कर सकेंगे. अगर समय सीमा के बाहर शिकायत की जाती है तो मुआवजा पाने में मुश्किल हो सकती है.
रबी सीजन में अब तक 10,254 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है. यह योजना ना केवल प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देती है, बल्कि किसानों को मानसिक शांति भी प्रदान करती है कि विपरीत परिस्थितियों में सरकार उनके साथ खड़ी है.
कृषि विभाग ने अपील की
कृषि विभाग ने अपील की है कि जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है वे 72 घंटे के भीतर अपनी शिकायत दर्ज कराएं. योजना का लाभ समय पर औपचारिकताएं पूरी करने पर ही मिल सकता है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण किसान हितैषी योजना है, जो न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम सुरक्षा प्रदान करती है. यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर रही है. अब बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और अन्य आपदाएं आम हो गई हैं. ऐसे में किसान भाइयों से आग्रह है कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और किसी भी क्षति की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराकर क्षतिपूर्ति प्राप्त करें. समय पर की गई कार्रवाई उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद करेगी और आगे की खेती के लिए भी सहारा देगी.