कुल्लू. रक्तदान को महादान कहा जाता है. क्योंकि इस दान से एक समय पर 3 जिंदगियों को बचाया जा सकता है. ऐसे में कई लोग रक्तदान को ही अपने जीवन का हिस्सा बना कर, कई जिंदगियों को संवारने का काम करते है. ऐसे ही कुल्लू के रहने वाले ओम प्रकाश आर ने न सिर्फ खुद रक्तदान कर कई लोगों को नई जिंदगी दी है, बल्कि इस सेवा से जुड़ने के लिए युवा पीढ़ी को भी प्रेरित कर रहे है.
109 बार कर चुके है रक्तदान
कुल्लू के रहने वाले 69 वर्ष के ओम प्रकाश आर एक ऐसे रातदाता है जिन्होंने आज तक 109 बार रक्तदान किया है. ओ अब ओम प्रकाश आर युवाओं को भी इस रक्तदान के महादान से जोड़ने का काम कर रहे हैं. ऐसे में उन्होंने बताया कि उनकी इच्छा है कि वह 111 बार रक्तदान करे और साथ ही इस मौके पर कुल्लू की हर एक पंचायत से 1 युवा को रक्तदान के क्षेत्र से जोड़े. ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति को रक्त के अभाव से न जूझना पड़े.
ब्लड कैंसर से मां को खोने के बाद शुरू किया रक्तदान
ओम प्रकाश आर बताते है कि उनकी माता को ब्लड कैंसर था. इसके कारण उन्हें बार बात पीजीआई चंडीगढ़ इलाज के लिए जाना पड़ता था. उन दिनों बल्ड बैंक्स में भी मुश्किल से खून मिलता था उर रक्तदाताओं को ढूंढना भी एक चुनौती रहती थी. वहां उन्होंने कई सारी महिलाओं को अस्पताल के बाहर अपने मरीजों के लिए खून अरेंज करने की मुश्किल से जूझते हुए देखा. ऐसे में उन्होंने खुद आगे बढ़ कर 1984 में पहली बार रक्तदान किया. ऐसे में में उन्होंने न सिर्फ रक्तदान करना शुरू किया बल्कि लोगों को रक्तदान का महत्व समझा कर रक्तदान करने के लिए भी जागरूक किया. ऐसे में उन्होंने लोगों को रक्तदान से जोड़ कर कई लोगों को नई जिंदगी भी दी. उन्होंने बताया कि अब उनके साथ कई लोग जुड़े हुए है.
रक्तदान से नहीं होती है शरीर में कमजोरी
ओम प्रकाश आर बताते है कि लोगों में यह भ्रम है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है. लेकिन सच यह है कि रक्तदान से शरीर का पुराना खून बाहर निकलता है जिससे 3 महीने के अंदर नया खून बन जाता है. इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि दिल की बीमारियों से भी व्यक्ति बचा रह सकता है.