40-50 लाख में डील, पटना के डॉक्टर भेजते थे क्लाइंट, संजीव मुखिया का बड़ा खुलासा
- May 1, 2025
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पटना. नीट (NEET) पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया ने EOU के सामने कई हैरान करने वाले खुलासे किए है. संजीव मुखिया ने बयाया कि उसका एक
पटना. नीट (NEET) पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया ने EOU के सामने कई हैरान करने वाले खुलासे किए है. संजीव मुखिया ने बयाया कि उसका एक
पटना. नीट (NEET) पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया ने EOU के सामने कई हैरान करने वाले खुलासे किए है. संजीव मुखिया ने बयाया कि उसका एक बहुत बड़ा नेटवर्क है. इस सिस्टम की चेन में पहले नंबर पर संजीव मुखिया और उनके कुछ लोग हैं. दूसरे नंबर पर रॉकी और उनका बेटा डॉ शिव हैं. तीसरे नंबर पर कुछ इंस्टीट्यूट के टीचर हैं, जो उनके पास क्लाइंट परीक्षार्थी भेजते हैं. ये क्लाइंट्स 40-50 लाख रुपये सेटिंग के एवज में देते हैं. संजीव मुखिया ने बताया कि इससे इंस्टीट्यूट को फायदा होता है क्योंकि उनके संस्थान के अभ्यर्थी मेडिकल परीक्षा क्रैक करते हैं और इंस्टीट्यूट का नाम रौशन होता है.
संजीव मुखिया ने बताया कि प्रिंटिंग प्रेस से जब पेपर निकलता है, तो तीन लॉक होते हैं, लेकिन परीक्षा केंद्र को केवल दो लॉक की जानकारी होती है. तीसरे लॉक की जानकारी संजीव मुखिया के पास होती है. दोनों लॉक को अनलॉक करने के बाद वे पेपर हासिल कर लेते हैं और तीसरे लॉक को फिर से लॉक करके पेपर को उसकी जगह भेज देते हैं, जिससे यह पता नहीं चलता कि पेपर पहले अनलॉक किया गया था या नहीं.
पत्नी को MP या MLA बनाना चाहता था संजीव मुखिया
संजीव मुखिया और उनकी टीम ने इसी सिस्टम का उपयोग NEET, BPSC, UP सिपाही भर्ती और बिहार सिपाही भर्ती परीक्षाओं में किया था. संजीव मुखिया ने कहा कि उन्हें पैसे का लालच नहीं है, बल्कि उनकी पत्नी को MP या MLA बनाना है, जिसके लिए मोटी रकम की जरूरत होती है. इसीलिए उन्होंने इस लाइन को चुना. संजीव मुखिया ने कई नेता और अधिकारियों के बच्चों के साथ-साथ अपने इलाके के लोगों के बच्चों को मेडिकल परीक्षा पास करवाया ताकि उन्हें एहसानमंद बना सकें. उनकी पत्नी पिछले विधानसभा चुनाव में LJP से लड़ी थी, लेकिन महज साढ़े तीन हजार वोटों से हार गईं. उन्हें अफसोस है कि अगर उनकी पत्नी निर्दलीय चुनाव लड़ी होती तो वे जीत जातीं.
बड़े-बड़े शहरों तक था संजीव मुखिया का नेटवर्क
संजीव मुखिया ने कहा कि वे NEET में नहीं आना चाहते थे. लेकिन, चैलेंज हारने के कारण उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी और इस कारण से उन्हें दोबारा इस लाइन में आना पड़ा और NEET पेपर लीक करवाया. देहरादून, चंडीगढ़, लखनऊ, कोलकाता, गुड़गांव, नोएडा, गुजरात (गांधीनगर) में उनकी काफी जान-पहचान है. इन जगहों से जब भी कोई कंपनी पेपर प्रिंटिंग के काम के लिए फॉर्म करती है, तो उन्हें पता चल जाता है और वे अपना काम शुरू कर देते हैं.
पटना बाइपास से सटे अस्पताल और क्लीनिक के डॉक्टर करते थे काम
संजीव मुखिया ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर काफी बेनामी संपत्ति बना रखी है. अब EOU संजीव मुखिया के खिलाफ आगे की कार्रवाई करने जा रही है. EOU ने बिहार के सभी SP, DSP के अलावा बिहार से सटे सभी राज्यों के SP से संजीव मुखिया के विरुद्ध दर्ज किसी भी तरह के आपराधिक मुकदमों को खंगालने और उस पर कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. EOU पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया के खिलाफ जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल कर उसे सजा दिलवाना चाहती है. पटना बाइपास से लगे कुछ अस्पताल और क्लीनिक के डॉक्टर उनके लिए सॉल्वर के रूप में काम करते हैं.
