February 20, 2026
Trending

12 साल से लकड़ी पर उकेरते हैं खूबसूरत आकृतियां, जानिए बोनेश की कहानी

  • April 22, 2025
  • 0

Last Updated:April 22, 2025, 11:52 IST कुल्लू के बोनेश पिछले 12 सालों से लकड़ी पर भगवानों की सुंदर आकृतियाँ उकेर रहे हैं. शौक से शुरू हुई यह कला

12 साल से लकड़ी पर उकेरते हैं खूबसूरत आकृतियां, जानिए बोनेश की कहानी

Last Updated:

कुल्लू के बोनेश पिछले 12 सालों से लकड़ी पर भगवानों की सुंदर आकृतियाँ उकेर रहे हैं. शौक से शुरू हुई यह कला अब उनका रोज़गार बन गई है. ढालपुर मैदान में बैठकर काम करते हैं और मूर्तियाँ 5000 रुपए तक बिक जाती हैं. वह…और पढ़ें

X

Yashoraj IT Solutions
ढालपुर

ढालपुर मैदान के पास लकड़ी पर मूर्तियां बनाते हुए बोनेश 

हाइलाइट्स

  • कुल्लू के बोनेश करीब 12 सालों से लकड़ी पर भगवानों की सुंदर आकृतियां उकेर रहे है.
  • शौक से शुरू हुई यह कला अब उनका रोज़गार बन गई है.
  • ढालपुर मैदान में बैठकर काम करते हैं और मूर्तियाँ 5000 रुपए तक बिक जाती हैं.

कुल्लू: कहते हैं कि कला और हुनर से किसी भी साधारण चीज़ को असाधारण बनाया जा सकता है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के रहने वाले बोनेश इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. वे बीते 12 वर्षों से लकड़ी पर भगवानों की सुंदर आकृतियाँ उकेर रहे हैं. पहले वे मिट्टी की मूर्तियाँ बनाते थे, लेकिन अब उनका रुझान लकड़ी की नक्काशी की ओर बढ़ गया है. इस कला के प्रति समर्पण और जुनून ने उन्हें न केवल पहचान दिलाई, बल्कि रोज़गार का साधन भी बना दिया.

12 साल से बना रहे है लकड़ियों पर खूबसूरत कलाकृति
बोनेश बताते हैं कि उन्होंने यह काम महज़ शौक के तौर पर शुरू किया था. पहले वह किराए का ऑटो चलाते थे और खाली समय में घर पर ही मिट्टी से मूर्तियाँ बनाया करते थे. धीरे-धीरे यह शौक उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. पिछले 12 सालों से वह पूरी तरह से इसी काम में जुटे हैं. अब वह ढालपुर मैदान के पास एक कोने में बैठकर अपनी कला को अंजाम देते हैं. राह चलते लोग रुक कर उनकी कलाकारी को देखते हैं और कई बार सीधे ऑर्डर भी दे देते हैं.

5000 रुपए तक बिक जाती है मूर्तियां
बोनेश का कहना है कि वे लोकल बाज़ार से लकड़ी खरीदते हैं और फिर अपने औज़ारों से उसपर महीन नक्काशी कर सुंदर मूर्तियाँ तैयार करते हैं. एक मूर्ति को बनाने में दो दिन तक का समय लग जाता है. उनकी कला को समझने वाले लोग एक मूर्ति की कीमत 5000 रुपये तक देने को तैयार रहते हैं. यह साबित करता है कि जब कला में सच्चाई और मेहनत हो, तो उसका मूल्य लोग खुद पहचान लेते हैं.

ढालपुर मैदान में करते हैं काम
बोनेश बताते है कि उन्हें इस कला को और निखारने में सुकून मिलता है. ऐसे में वह हर रोज ढालपुर मैदान में आकर एक कोने में बैठकर इस कला पर काम करते है. इस दौरान आते जाते राहगीर उनकी इस कला को देख कर कई बार उन्हें ऑर्डर भी दे देते है. ऐसे में उनकी इच्छा है कि वह इस कला को और बढ़ा सके. साथ ही अगर कोई युवा इस कला को सीखना चाहता है तो वह आने वाली पीढ़ी को भी इस कला से जोड़ने का सपना देखते है.

homehimachal-pradesh

12 साल से लकड़ी पर उकेरते हैं खूबसूरत आकृतियां, जानिए बोनेश की कहानी

source

Dental CLinic Pro
yashoraj infosys : best web design company in patna bihar
yashoraj infosys : best web design company in patna bihar