January 30, 2026
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11 साल का लड़का बना चेस चैंपियन… 3 की उम्र से सीख रहा था चालें, अब इंटरनेशनल

  • April 29, 2025
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खंडवा. खंडवा में आयोजित राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में 11 साल के इंदौर निवासी आदिविक गुप्ता ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अंडर-11 कैटेगरी में सेकंड पोजीशन हासिल की.

11 साल का लड़का बना चेस चैंपियन… 3 की उम्र से सीख रहा था चालें, अब इंटरनेशनल

खंडवा. खंडवा में आयोजित राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में 11 साल के इंदौर निवासी आदिविक गुप्ता ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अंडर-11 कैटेगरी में सेकंड पोजीशन हासिल की. यह सफलता साधारण नहीं है, क्योंकि आदिविक की यह यात्रा मात्र तीन साल की उम्र में शुरू हो गई थी. जब बाकी बच्चे बोलना और चलना सीख रहे होते हैं, तब आदिविक अपने पापा को शतरंज खेलते देख कर चालें सीख रहे थे.

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पिता से मिली प्रेरणा
आदिविक के पिता नीलेश गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. वे खुद शतरंज खेलने के शौकीन थे और जब आदिविक ने पहली बार उन्हें खेलते देखा, तो खेल में रुचि लेने लगे. धीरे-धीरे यह रुचि जुनून में बदल गई. आदिविक ने सिर्फ खेलना ही नहीं सीखा, बल्कि उसमें महारत भी हासिल कर ली. आज उनकी इंटरनेशनल चेस रेटिंग 1431 है, जो इस उम्र में एक शानदार उपलब्धि मानी जाती है.

खंडवा टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन
खंडवा में हाल ही में आयोजित टूर्नामेंट में आदिविक ने कुल 6.5 अंक अर्जित किए और अंडर-11 वर्ग में दूसरा स्थान प्राप्त किया. वे इससे पहले भी राज्य स्तरीय चैंपियन रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. उनके बड़े पापा संदेश गुप्ता, जो खंडवा के पूर्व पार्षद रह चुके हैं, बताते हैं कि जब आदिविक छोटा था, तो वह जबरदस्ती अपने भाई को शतरंज खेलने बुलाता था. आज वही बच्चा स्टेट और नेशनल लेवल पर चैंपियन बन चुका है. पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है.

परिवार बना मजबूत सहारा
आदिविक की मां अनुपमा गुप्ता और पूरा परिवार उसके हर मैच में उसका हौसला बढ़ाते हैं. उनके अनुसार, आदिविक सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अव्वल है. वह इंदौर के सीका स्कूल में पढ़ाई कर रहा है और स्कूल स्तर पर भी कई प्रतियोगिताएं जीत चुका है.

सपना है ग्रैंड मास्टर बनने का
खास बात यह है कि आदिविक का सपना ग्रैंड मास्टर बनना है. वह विश्व स्तरीय खिलाड़ी बनना चाहता है और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना चाहता है. वह मानता है कि शतरंज से उसका मस्तिष्क तेज होता है और यह खेल उसे मानसिक मजबूती देता है.

पूरा परिवार है प्रतिभा का प्रतीक
आदिविक के परिवार की बात करें तो उनकी बहन पत्रकार बनने की तैयारी कर रही है और कई बार न्यूज चैनलों पर एंकरिंग कर चुकी है. वहीं उनका छोटा भाई पेंटिंग और स्केचिंग में माहिर है. एक ही परिवार में इतने हुनरमंद बच्चे होना अपने आप में प्रेरणा की बात है.

परिवार की बड़ी उम्मीदें
उनके बड़े पापा कहते हैं कि हम सब चाहते हैं कि आदिविक सिर्फ नेशनल नहीं, बल्कि इंटरनेशनल चैंपियन बने. उसका नाम देश-विदेश में हो और लोग कहें कि खंडवा के एक बच्चे ने भारत का नाम रोशन किया. खंडवा जैसी छोटी जगह से निकलकर देशभर में नाम कमाना आसान नहीं होता, लेकिन आदिविक ने यह साबित कर दिया कि अगर समर्पण हो, परिवार का साथ हो और मेहनत निरंतर हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता.

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