कांगड़ा: बरसात का सीजन चल रहा है और इस दौरान सांप अपने बिलों से बाहर निकलते हैं, जिससे कई लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है. हिमाचल प्रदेश में ऐसे जहरीले सांप पाए जाते हैं जो आपके लिए बेहद घातक हो सकते हैं. खेतों में अधिक घास होने की वजह से सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं, जिससे प्रदेश में हर साल औसतन 100 लोगों की मौत होती है.
सांपों की 21 प्रजातियां
हिमाचल में सांपों की करीब 21 प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से तीन प्रजातियां – कॉमन करैत (Common Krait), स्पेक्टेकल कोबरा और रसल वाइपर (Russell’s viper) सबसे जहरीली हैं. इसके अलावा, चार प्रजातियां थोड़ी कम जहरीली हैं और 15 प्रजातियां ऐसी हैं जिनके काटने से आदमी की मौत नहीं होती.
डॉक्टरी इलाज है जरूरी
वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक जोनल हॉस्पिटल धर्मशाला, अनुराधा शर्मा ने बताया कि अगर आपको किसी जीव ने काट लिया है, तो तुरंत अस्पताल जाएं. कई बार सर्पदंश का निशान नहीं दिखता, ऐसे में समय बर्बाद न करें, क्योंकि यह आपकी जान के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने बताया कि अस्पताल में सांप के काटने पर लगाए जाने वाले एंटीवेनम उपलब्ध होते हैं और तुरंत इलाज दिया जाता है, ताकि मरीज स्वस्थ हो सके. उन्होंने लोगों से अपील की है कि अंधविश्वास में न पड़ें और डॉक्टरी इलाज के लिए तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं.
हर साल हजारों लोग ज़हरीले साँपों के काटने से गंवा देते हैं जान
हर साल विश्वभर में लोग सांप का शिकार होते हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका में हर साल लगभग 7,000 से 8,000 ज़हरीले साँपों के काटने की घटनाएँ होती हैं, लेकिन केवल 5 से 10 ही जानलेवा होते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर साल अनुमानित 45 लाख से 54 लाख लोग साँपों के काटने से पीड़ित होते हैं. इस अनुमान के अनुसार, हर साल 18 लाख से 27 लाख लोग साँप के काटने के बाद बीमार पड़ जाते हैं और 81,000 से 1,38,000 लोग साँप के काटने से मर जाते हैं.