'सुशील ने जैसे ही कहा- मैं ईसाई हूं तो नीचे गिराया, छाती में गोलियां मारीं'
- April 24, 2025
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इंदौर: पहलगाम में आतंकियों के निशाने पर केवल हिंदू ही नहीं, हर गैर मुस्लिम शख्स था. इंदौर के सुशील नैथेनियल भी अपने मजहब की वजह से ही आतंकियों
इंदौर: पहलगाम में आतंकियों के निशाने पर केवल हिंदू ही नहीं, हर गैर मुस्लिम शख्स था. इंदौर के सुशील नैथेनियल भी अपने मजहब की वजह से ही आतंकियों
इंदौर: पहलगाम में आतंकियों के निशाने पर केवल हिंदू ही नहीं, हर गैर मुस्लिम शख्स था. इंदौर के सुशील नैथेनियल भी अपने मजहब की वजह से ही आतंकियों के शिकार हुए. वह कलमा नहीं पढ़ सके और उन्हें गोली मार दी गई. बुधवार शाम को इंदौर एयरपोर्ट से अपने पति सुशील के बिना जब जेनिफर नैथेनियल जब अपने घर पहुंची तो उनकी जुबां पर एक ही बात थी. वह बार-बार कह रही थी कि “उन्होंने मेरे सामने उसे मार डाला… मैं अपने पति को नहीं बचा सकी.” वह रोते हुए उस दर्दनाक और कभी ना भूल सकने वाले मंजर को याद करते हुए कह रही थी कि उन्होंने धर्म पूछकर किसी को नहीं बख्शा.
जेनिफर ने आंखों से लगातार बहते आंसू के बीच कहा, “जिस तरह मैं उन्हें अपने साथ ले गई थी, मैं अपने पति को उस तरह वापस नहीं ला सकी. उन्होंने मेरी जान बचाने के लिए अपने सीने पर गोली खा ली.
जेनिफर ने आतंकियों के बारे में कहा कि वे तीन थे और सभी युवा. उन्होंने मेरे पति पर बंदूक तान दी और उनसे कलमा पढ़ने को कहा. मेरे पति ने उनसे कहा कि वे ईसाई हैं और कलमा पढ़ना नहीं जानते. उन्होंने बस इतना ही कहा… फिर उनमें से एक ने उन्हें धक्का दिया और सीने में गोली मार दी.” यह कहते-कहते वह टूट जाती हैं और जोर-जोर से रोने लगती हैं. इस तरह धरती के स्वर्ग यानि कश्मीर में फैमिली वेकेशन का यह सफर इंदौर के नैथेनियल परिवार के लिए अकल्पनीय त्रासदी बन गया.
जेनिफर ने अपनी सास और सुशील की मौसी रोसिना कुमरावत को बताया कि जब वे पहलगाम की बैसरन घाटी के लिए निकले थे, तो सुबह एकदम शांत थी. किसी को आगे आने वाली भयावहता का कोई अंदाजा नहीं था. इंदौर एयरपोर्ट से वापस आते समय जेनिफर ने रोसिना से कहा, “हम सुबह करीब 11 बजे निकले. उस दिन घाटी में बहुत भीड़ थी. वहां कई टट्टू थे. चूंकि मुझे सवारी करना नहीं आता, इसलिए मैं पहले से ही थोड़ा घबराई हुई थी.” वह घोड़ों पर सवार हुए और संकरी पगडंडियों को पार किया. चाय-नाश्ता किया और तस्वीरें क्लिक करने के लिए सुंदर जगहों पर रुके.
भीड़ में पारंपरिक कश्मीरी पोशाक पहने दो आदमी थे, जो मवेशियों को चरा रहे थे. वह बताती हैं कि वे पहले तो संदिग्ध नहीं लगे, लगा जैसे स्थानीय लोग हैं, लेकिन एक आदमी इधर-उधर चक्कर लगाता रहा, दूसरे पर्यटकों की तरह तस्वीरें नहीं ले रहा था. मुझे उसकी गतिविधियों पर शक हुआ और मुझे लगा कि कुछ बुरा होने वाला है. कुछ ही पलों बाद खौफनाक मंजर सामने आया. आर्मी की तरह दिखने वाले कपड़े पहने तीन आदमी अचानक भीड़ से निकले. बिना किसी चेतावनी के उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
जेनिफर ने अपने रिश्तेदार को बताया कि दो छोटे लड़के बुरी तरह घायल हो गए. उन्हें मौका भी नहीं मिला. जब यह सब हो रहा था, मेरे पति ने मेरी ओर जैकेट फेंकी और मुझे इसे पहनने का इशारा किया, जैसे कि वह मुझे गोलियों से बचाना चाहते थे. इस अफरातफरी के बीच वे उनके पास आए और उनके सिर पर हथियार रख दिया और उनसे कलमा पढ़ने को कहा.
जब उन्होंने कहा कि वह ईसाई हैं, तो उन्होंने उन्हें जमीन पर धकेल दिया और कई बार गोली मारी. उन्होंने कहा. गोलियां हवा में गूंज रही थीं. मैं कुछ नहीं कर सकती थी. मुझे दूर धकेल दिया गयाउन्होंने कांपती आवाज़ में कहा. मैं किसी को नहीं बचा सकी. रोसिना ने कहा कि उनकी बेटी आकांक्षा अपने माता-पिता और भाई के साथ घाटी में नहीं गई थी और अभी भी तलहटी में थी, जब उसकी मां ने उसे फोन पर बताया कि आतंकवादियों ने उसके पिता को गोली मार दी है. वह उन्हें खोजने की कोशिश करने के लिए घटनास्थल की ओर भागी और इस कोशिश में घायल हो गई. उन्होंने कहा कि ऑस्टेन को स्थानीय टट्टू वालों ने बचाया, जिन्होंने उसे जानवरों के पीछे छिपा दिया और उसे विभिन्न रास्तों से नीचे लाए.
इस हमले में मारे गए सुशील नैथेनियल का पार्थिव शरीर जब गृहनगर पहुंचा, तो वहां उनकी पत्नी जेनिफर, बेटी आकांक्षा, जिनके बाएं पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ था, और बेटा ऑस्टेन भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद हवाई अड्डे पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मिले. अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और राज्य की ओर से सहायता का आश्वासन दिया.
मुख्यमंत्री यादव ने हवाई अड्डे पर कहा, “पूरा मध्य प्रदेश नैथेनियल परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में खड़ा है. हम आतंकवाद के इस कायरतापूर्ण कृत्य की निंदा करते हैं, जिसने एक प्यारे पति और पिता को छीन लिया है.”
