January 29, 2026
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सांप ने डसा, सांसें थमीं… लेकिन पाली के डॉक्टरों ने सात दिन में मौत को दी मात

  • July 15, 2025
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Last Updated:July 15, 2025, 21:47 IST Pali News: पाली में 13 साल के उदय सिंह को सांप ने काटा, बांगड़ अस्पताल के डॉक्टरों ने सात दिन तक वेंटिलेटर

सांप ने डसा, सांसें थमीं… लेकिन पाली के डॉक्टरों ने सात दिन में मौत को दी मात

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Pali News: पाली में 13 साल के उदय सिंह को सांप ने काटा, बांगड़ अस्पताल के डॉक्टरों ने सात दिन तक वेंटिलेटर पर रखकर सौ से ज्यादा इंजेक्शन देकर उसकी जान बचाई. उदय सिंह अब पूरी तरह स्वस्थ है.

हाइलाइट्स

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  • पाली में 13 साल के उदय सिंह को सांप ने काटा.
  • डॉक्टरों ने सात दिन तक वेंटिलेटर पर रखकर जान बचाई.
  • उदय सिंह अब पूरी तरह स्वस्थ है.
पाली. भगवान तो नहीं लेकिन भगवान से कम भी नहीं कह सकते उन चिकित्सकों को जिन्होंने हर उस इंसान की जान को बचाने का काम किया है जो कभी मौत के मुंह में जाने वाला था. ऐसा ही एक मामला पाली शहर में सामने आया जहां 13 साल के एक मासूम को जब सांप ने काट लिया और बचने की उम्मीद लगभग ना के बराबर थी. ऐसे में बांगड़ अस्पताल के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने हार नहीं मानी और बच्चे की जान को बचाने का संघर्ष ऐसा किया कि मौत भी इन डॉक्टरों के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हो गई. सात दिन तक वेंटिलेटर पर रखकर सौ से ज्यादा इंजेक्शन लगाने का परिणाम यह रहा कि बच्चा आज पूरी तरह से स्वस्थ है और अपने परिवार के साथ सुरक्षित है.

13 साल के मासूम को सांप ने डस लिया तो रोते-बिलखते परिजन उसे बांगड़ अस्पताल लेकर पहुंचे. हालत इतनी नाजुक थी कि बचाना बेहद मुश्किल लग रहा था. लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और लगातार सात दिन तक सौ से ज्यादा इंजेक्शन लगाए. बच्चे की हालत धीरे-धीरे सुधरी और आखिरकार उसे छुट्टी दे दी गई. यह बच्चा मध्य प्रदेश के भोपाल के थम्पू क्षेत्र का निवासी उदय सिंह है जो पाली के जवाली गांव में अपने परिजनों के साथ आया हुआ था.

5 जुलाई को हुआ था सांप का हमला
उदय सिंह 5 जुलाई की रात अपने घर पर सो रहा था जब उसे सांप ने पैर में डस लिया. उसकी चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन दौड़े और तुरंत उसे पाली के बांगड़ अस्पताल ले गए. ट्रॉमा वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई (PICU) में शिफ्ट किया गया जहां चार दिन तक विशेष निगरानी में इलाज किया गया.

न्यूरोपैनेटिक स्नेक बाइट, बेहद नाजुक हालत
बांगड़ हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ परेश दवे ने बताया कि यह न्यूरोपैनेटिक टाइप का स्नेक बाइट था. बच्चे को आते ही ट्रॉमा में लिया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया. तुरंत एंटी स्नेक वेनम और अन्य दवाएं देना शुरू की गईं. समय-समय पर दवा की खुराक और समय का अंतराल बढ़ाया गया. यही रणनीति काम आई और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया. इलाज में डॉ रफीक कुरैशी और डॉ एसएन स्वर्णकार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. शुरुआत में हर 15 मिनट पर बच्चे को इंजेक्शन दिए गए. फिर हर आधे घंटे, हर दो घंटे, चार घंटे और फिर छह घंटे में इंजेक्शन दिए गए. कुल मिलाकर बच्चे को सौ से अधिक इंजेक्शन और दवाएं दी गईं. तब जाकर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाला जा सका.

PICU टीम ने निभाई भगवान जैसी भूमिका
इस कठिन समय में PICU वार्ड की पूरी टीम ने एकजुट होकर काम किया. टीम में यूनिट हेड डॉ रफीक कुरैशी, डॉ एसएन स्वर्णकार, डॉ परेश दवे के अलावा डॉ समीर, डॉ अंकुर, हेमलता कटारिया, नरेन्द्र चौहान, कुंदन, अभिमन्यु मौर्य, सुजाराम, कुलदीप गोयल, हितेश, डॉ हिमानी, कैलाश कुमार मोहित और कुलदीप मेवाड़ा शामिल थे. इन सभी की लगातार मेहनत और समर्पण की वजह से ही एक मासूम की जान बच सकी.

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