शुरू तुमने किया, खत्म मैं करूंगा, दिल्ली की दुश्मनी का लंदन से बदला
- April 13, 2025
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सुबह का समय था, सूरज की पहली किरणें सड़कों को रोशन कर रही थी. चाय की दुकानों पर चुस्कियों के राजनीतिक बातें शुरू हो गई थीं, पास में
सुबह का समय था, सूरज की पहली किरणें सड़कों को रोशन कर रही थी. चाय की दुकानों पर चुस्कियों के राजनीतिक बातें शुरू हो गई थीं, पास में
सुबह का समय था, सूरज की पहली किरणें सड़कों को रोशन कर रही थी. चाय की दुकानों पर चुस्कियों के राजनीतिक बातें शुरू हो गई थीं, पास में कुछ कुत्ते थे, जो ललचाई नजरों से इंसानों को देख रहे थे. जीवन भी स्लो मोशन में शुरू चुका था. लोग सड़कों पर ट्रैक सूट में पार्कों की तरफ तेज कदमों से भार रहे थे, जिम जाने वाले भी तेजी जिमखाना पहुंचना चाह रहे थे.तभी नजर तेजी से आरही चमचमाती फॉर्च्यूनर पड़ती है. कार के अंदर 52 साल के प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार दहिया रोज की तरह ही जिम जा रहे थे. उनके साथ क्या होने वाला है, इससे बिलकुल ही अनभिज्ञ हैं, वह फोन पर थे, किसी से बात हो रही थी. हां भाई, प्लॉट का सौदा पक्का हो गया है मंजीत भाई को बता देना काम हो जाएगा.
तभी एक स्विफ्ट उनकी फॉर्च्यूनर के पीछे आती हैं. स्विफ्ट कार में चार लोग हैं. स्विफ्ट तेजी से फॉर्च्यूनर को ओवरटेक करती है और सामने आकर रास्ता रोक लेती है. दूसरी कार स्कॉर्पियो पीछे से टक्कर मारती है. राजकुमार घबराकर ब्रेक लगाता है. चार लोग शुभम, तरणजीत, सूरज और शौकीन खान हथियारों के साथ कार से उतरते हैं. उनके चेहरों पर गुस्सा और ठंडी क्रूरता एक साथ दिखती है.
शुभम पिस्तौल तानते हुए राजकुमार से कहता है निकल बाहर, आज तेरा हिसाब होगा. राजकुमार को साफ पता चलता है कि ज उसका आखिरी दिन है या फिर ये लोग पैसे छिनने के लिए आए हैं. लेकिन एक नाम ने उसके हो उड़ा देते हैं. पहले तो राजकुमार घबराते हुए पूछते हैं- भाई, मैंने क्या किया? बात क्या है?
दूसरा शूटर कहता है मंजीत महाल का नाम सुना है? तू उसका पिट्ठू बन रहा था ना! अब तैयार हो जा, नंदू भाई ने तेरा टिकट काटने का ऑर्डर दिया है.इससे पहले कि राजकुमार कुछ कह पाते, हमलावर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगते हैं8 गोलियां राजकुमार के शरीर को छलनी कर देती है. वह स्टीयरिंग पर ही लुढ़क जाते हैं. हमलावर तेजी से अपनी कारों में बैठकर भाग जाते हैं. सड़क पर चीखें और अफरा-तफरी का माहौल है.
दिल्ली पुलिस हमलावरों को लंदन की एक लग्जरी फ्लैट में एक शख्स बैठा है. वह इस खूनी खेल का करता धरता है. राजकुमार की हत्या को लाइव देखता है. उसका चेहरा ठंडा और आत्मविश्वास से भरा है. वह फेसबुक खोलता है और एक पोस्ट टाइप करता है. पोस्ट में वह लिखता है जिसका पुलिस को उम्मीद नहीं है- मैंने ही पश्चिम विहार में हत्या करवाई है.
राजकुमार दहिया मेरे दुश्मन मंजीत महाल के लिए प्लॉट पर कब्जा करता था. जब मंजीत महाल जनवरी में पैरोल कस्टडी में आया था, तब ये दोनों भाई उससे मिलने गए थे. जो मंजीत महाल का साथ देगा, वो मेरा दुश्मन होगा. जो मंजीत का खास बनेगा, उसका यही अंजाम होगा. यह विक्टिम कार्ड मत खेलो…तुमने शुरू किया था, मैं इसे खत्म करूंगा!
साल 2015 की बात है, मंजीत महाल जो कि कपिल का जानी दुश्मन है…. उसके गुर्गों संग कपिल के बहनोई सुनील उर्फ ‘डॉक्टर’ की हत्या करवा देता है. कपिल तब से ही बदले की आग में जल रहा था. इधर राजकुमार और उसके भाई का मंजीत से मिलना जुलना बढ़ जाता है. वह गुस्से से चेहरा तमतमा जाता है. कपिल चीखते हुए कहता है. कपिल मन ही मन कहता है- मंजीत, तूने मेरे बहनोई को मारा! मैं तुझे छोडूंगा नहीं. उसने मंजीत के करीबियों को मारना शुरू कर दिया. 2017 में मंजीत पिता श्रीकृष्ण को नजफगढ़ में उनके घर के बाहर गोली मार दिया जाता है. गैंगवार की आग भड़क उठती है. दोनों तरफ से दर्जनों लोग मारे जाते हैं.
इधर दिल्ली पुलिस भी हत्याकांड के बाद हरकत में आती है. चार लोगों के नाम सामने आती है. बोर्ड पर चार हमलावरों—शुभम, तरणजीत, सूरज और शौकीन खान के नाम लिखे जाते हैं और उनको पकड़ने के लिए धरपकड़ शुरू हो जाती है. वहीं, कपिल के लिए इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जाता है. लेकिन, सवाल अभी मुंह बाये खड़ा है कि क्या कपिल को दिल्ली पुलिस अरेस्ट कर पाएगी?
