शादी की हसरत में कुंआरे आते हैं डंडे खाने, रातभर शहर रहता है महिलाओं के हवाले
- April 17, 2025
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Last Updated:April 17, 2025, 12:14 IST Jodhpur News: जोधपुर में 16 दिन गणगौर की पूजा करने के बाद तिजानिया (महिलाएं) सज धज कर और स्वांग रचकर सड़कों पर
Last Updated:April 17, 2025, 12:14 IST Jodhpur News: जोधपुर में 16 दिन गणगौर की पूजा करने के बाद तिजानिया (महिलाएं) सज धज कर और स्वांग रचकर सड़कों पर
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महिलाएं अलग-अलग स्वांग रचाकर रातभर सड़कों पर घूमती हैं.
हाइलाइट्स
जोधपुर. अपणायत के शहर और राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले जोधपुर शहर के महामंदिर के भीतरी क्षेत्र में बुधवार रात महिलाओं का राज रहा. मौका था धींगा गवर की मस्ती का. जोधपुर में 16 दिन गणगौर की पूजा करने के बाद तिजानिया (महिलाएं) सज धज कर और स्वांग रचकर बाहर निकलती है. यहां महिलाएं हाथ में बेंत रखती है और मर्दों को उससे पिटती है. जोधपुर में इस मस्ती की शहर के हर कुंवारे की इच्छा रहती कि महिलाएं उनको बेंत मारे ताकि उनकी भी शादी हो जाए.
दरअसल मान्यता है कि धींगा गवर में कोई महिला किसी कुंवारे को छड़ी मार देती है तो उसकी शादी जल्दी हो जाती है. बुधवार रात को इस प्रथा को दोहराया गया. शहर में महिलाएं धींगा गवर की मस्ती झूमती हुई नजर आई. महिलाओं ने अलग अलग स्वांग रचकर खूब रंग जमाया. गुरुवार तड़के तक महिलाएं मस्ती में झूमती रही. खास बात ये है इस धम चक में एक रात के लिए विधवाओं को भी जमकर मस्ती करने की इजाजत होती है. शायद दुनिया की यही एकमात्र जगह है जहां विधवाएं भी डंडे बरसाती हैं और मर्द इस बात का जरा भी एतराज नहीं करते.
महामंदिर के भीतरी क्षेत्र की गलियों में रहता है जोर
धींगा गवर का सबसे ज्यादा जोर जोधपुर के महामंदिर के भीतरी क्षेत्र की गलियों में रहता है. यहां औरत ही राजा होती है और औरत ही रानी. औरतें ही राम होती हैं और औरतें ही रावण बनती हैं. इन सबके बीच अगर कोई मर्द आ जाता है तो उसे डंडे (बेंत) खानी पड़ते हैं. शादीशुदा मर्द इन बेंतों से बचने का प्रयास करते हैं और कुंवारे बेंत खाने के इच्छुक रहते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि अगर धींगा गवर की महिला की बेंत किसी कुंवारे को पड़ जाए तो उसकी सालभर में शादी हो जाती है. बस इसी इच्छा के चलते वे बेंत खाने आते हैं. इसके लिए वे महिलाओं के समूह में घुसपैठ करने का प्रयास भी करते हैं.
व्रत का उद्ध्यापन करने से पहले शाम को सज धजकर सड़कों पर निकलती हैं
गणगौर के त्योहार पर सोलह दिन तक सुहाग की लम्बी उम्र के लिए पूजा अर्चना करने वाली सुहागिनें के सोलहवें दिन के व्रत के उद्ध्यापन करने से पहले शाम को सज धजकर सड़कों पर निकलती हैं. उनके लिए जगह जगह गाने बजते हैं. लड़कियां डांस करती है. स्वांग रचाए औरतें घूमती है. ये सब अगले दिन सुबह पांच बजे उद्ध्यापन की पूजा होने तक चलता है. उसके बाद फिर सभी अपने अपने घर जाती हैं. जोधपुर में हर साल एक रात शहर की भीतरी गलियों में केवल औरतों का राज होता है. वहां अगर मर्द जाते हैं तो सिर्फ और सिर्फ डंडे खाने.
