बलिया: यूपी के बलिया जिले में सिंहोरा और मउर बनाने की परंपरा बेहद प्राचीन है. जी हां! आपने बिल्कुल सही सुना है. बलिया रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित हनुमानगंज की पहचान ही सिंहोरा और मउर से होती है. यहां के मउर की डिमांड काफी दूर-दूर तक है. आज हम आपको यहां के मउर की खासियत बताने जा रहे है. यहां आप 100 रुपए से लेकर 600 रुपए की कीमत से मिलने वाले इस मउर के बिन पूरा विवाह संस्कार अधूरा माना जाता है. छोटे से लेकर बड़े-बड़े लोग यहां मउर खरीदने आते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में…
दुकानदार विशाल गुप्ता ने बताया कि इसे मउर कहा जाता है, इसको बनाने के लिए तार, साज और फूल जैसे तमाम समानों की जरूरत पड़ती है. यह बलिया के हनुमानगंज गांव में सदियों से बनाया जाता रहा है. एक मउर बनाने में लगभग डेढ़ से पौने दो घंटे लग जाते हैं. इसकी जरूरत विवाह के दौरान मंडप में दूल्हा-दुल्हन के फेरे लेते समय और इमली घोटावन में पड़ती है.
जानें मउर बनाने की परंपरा
इस मउर को खरीदने के लिए यहां दुकान पर छोटे से लेकर बड़े-बड़े लोग आते हैं. यह बड़ी प्राचीन प्रथा है कि सिंहोरा और मउर के बिन शादी पूरी नहीं होती है. फिलहाल इस दुकान के शुरू हुए लगभग 25 से 30 साल हो गए हैं. दुकानदार विशाल ने बताया कि उसके बाबा के जमाने से यह बिजनेस होता चला आ रहा है.
यहां के मउर की दूर-दूर तक है डिमांड
दुकानदार ने बताया कि यह मउर न केवल बलिया में बल्कि, सिवान, देवरिया, गोरखपुर, नेपाल, बिहार, पटना और छपरा जैसे दूर-दूर जगहों तक जाता है. विवाह शादी में इसकी डिमांड बढ़ जाती है. इसमें तमाम प्रकार के डिजाइन होते हैं, जिसके आधार पर कीमत तय की जाती है. यहां 100 रुपए से लेकर 600 तक के मउर मिलते हैं. वैसे इस पूरे काम को विशाल के पिता गनेश गुप्ता करते हैं. विशाल पढ़ाई के साथ-साथ बिक्री के लिए सिंहोरा और मउर भी बनाते हैं.
यहां मउर से सैकड़ों परिवारों को मिला है रोजगार
दुकानदार ने बताया कि अभी तक उनका सारा इसी से हुआ है. यह उनके पूरे परिवार का एक बड़ा आधार है. वैसे सैकड़ो लोगों के लिए सिंहोरा और मउर बेचने का बिजनेस एक रोजगार का बड़ा साधन बना हुआ है. यह क्षेत्र इसके लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. आज के आधुनिक युग में भी सिंहोरा और मउर की डिमांड शादी-विवाह के दौरान खूब होती है.