January 29, 2026
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“वास्तु शास्त्र: उत्तर-पूर्व दिशा में बच्चों का कमरा क्यों नहीं होना चाहिए? जानिए पूरी सच्चाई”

  • January 18, 2026
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वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण भी कहा जाता है, को घर की सबसे पवित्र और ऊर्जावान दिशा माना जाता है। यह दिशा सीधे तौर पर

“वास्तु शास्त्र: उत्तर-पूर्व दिशा में बच्चों का कमरा क्यों नहीं होना चाहिए? जानिए पूरी सच्चाई”

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण भी कहा जाता है, को घर की सबसे पवित्र और ऊर्जावान दिशा माना जाता है। यह दिशा सीधे तौर पर आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक तरंगों और दिव्य शक्तियों से जुड़ी होती है। इसी कारण इसे पूजा, ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है। लेकिन जब बात आती है बच्चों के कमरे की, तो वास्तु विशेषज्ञ इस दिशा में बच्चों का कमरा बनाने से मना करते हैं।

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आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि उत्तर-पूर्व दिशा बच्चों के लिए क्यों उपयुक्त नहीं मानी जाती, इसके पीछे वास्तु का क्या तर्क है और इस दिशा का सही उपयोग कैसे किया जाना चाहिए।


उत्तर-पूर्व दिशा का वास्तु महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा में वास्तु पुरुष का सिर स्थित होता है। इस कारण यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और पवित्र माना जाता है। यहां की ऊर्जा अत्यधिक शांत, सात्विक और आध्यात्मिक होती है। यह दिशा मन को स्थिर, शांत और ईश्वर से जोड़ने वाली होती है।

यही कारण है कि:

  • मंदिर

  • ध्यान कक्ष

  • योग कक्ष

  • अध्ययन कक्ष

के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को सर्वोत्तम माना जाता है।


बच्चों का कमरा उत्तर-पूर्व में क्यों नहीं होना चाहिए?

वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा, महत्वाकांक्षा, प्रतिस्पर्धा और व्यावहारिक सोच की आवश्यकता होती है। जबकि उत्तर-पूर्व दिशा की ऊर्जा बच्चों को अधिक आध्यात्मिक और भावनात्मक बना देती है।

अगर बच्चा इस दिशा में रहता है तो उसमें निम्न परिवर्तन देखे जा सकते हैं:

1. अत्यधिक धार्मिक प्रवृत्ति

बच्चा पढ़ाई और करियर की बजाय पूजा-पाठ, भक्ति और एकांत की ओर अधिक आकर्षित हो सकता है।

2. प्रतिस्पर्धा की भावना में कमी

उसमें जीवन में आगे बढ़ने की जिद और संघर्ष की भावना कम हो सकती है।

3. आत्मविश्वास में गिरावट

व्यावहारिक निर्णय लेने में कठिनाई आ सकती है।

4. सामाजिक दूरी

बच्चा मित्रों और सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना सकता है।

5. करियर पर प्रभाव

भविष्य में प्रोफेशनल लाइफ में स्थिरता पाने में उसे संघर्ष करना पड़ सकता है।

इसी कारण वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि उत्तर-पूर्व दिशा बच्चों के शयनकक्ष के लिए उपयुक्त नहीं होती।


दंपत्तियों के लिए भी क्यों नहीं?

उत्तर-पूर्व दिशा की ऊर्जा रोमांस, दांपत्य सुख और पारिवारिक जीवन के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। इस दिशा में रहने से दंपत्तियों के बीच भावनात्मक दूरी, वैचारिक मतभेद और शारीरिक आकर्षण में कमी देखी जा सकती है।

इसलिए यह दिशा दंपत्तियों के बेडरूम के लिए भी अनुशंसित नहीं है।


यह कमरा किनके लिए सबसे उपयुक्त है?

उत्तर-पूर्व दिशा का कमरा सबसे अधिक उपयुक्त होता है:

  • साधु-संत या आध्यात्मिक व्यक्ति

  • बुजुर्ग लोग

  • ध्यान और साधना करने वाले लोग

  • पूजा या मेडिटेशन रूम

  • लाइब्रेरी या स्टडी रूम

यह दिशा मन को शांति, संतुलन और आत्मिक विकास प्रदान करती है।


इस दिशा में बिस्तर कैसा होना चाहिए?

अगर किसी कारणवश इस दिशा में बिस्तर रखना ही पड़े तो:

  • बिस्तर हल्का होना चाहिए

  • लकड़ी का होना श्रेष्ठ माना जाता है

  • भारी बॉक्स बेड या लोहे का पलंग नहीं रखना चाहिए

  • बेड के नीचे सामान स्टोर नहीं करना चाहिए

भारी पलंग इस दिशा की सकारात्मक ऊर्जा को दबा देता है, जिससे नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है।

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