नई दिल्ली: पहलगाम नरसंहार जिसमें 26 लोगों की हत्या धर्म पूछकर की गई उसके लिए पूरे देश में गुस्से का माहौल है. लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का कलेजा पाकिस्तान के लिए फट रहा है. उन्होंने एक बार फिर पहलगाम नरसंहार पर विवादित बयान दिया है. पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने बेगुनाहों की हत्या की निंदा तो की लेकिन उनके कुछ बयानों को लेकर तीखी आलोचना हो रही है. खासकर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर उनकी टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर उन्हें पड़ोसी मुल्क की इतनी चिंता क्यों है.
दरअसल मौलाना मदनी ने कहा कि अगर जंग के हालात बनते हैं तो भारत के रुपए की कीमत काफी गिर जाएगी. उनके इस बयान को कई लोगों ने गैरजरूरी और भारत विरोधी तक करार दिया है. लोगों का कहना है कि उन्हें भारत में वक्फ कानून और मुसलमानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी राय रखनी चाहिए, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताना समझ से परे है. सोशल मीडिया पर भी उनके इस बयान की जमकर आलोचना हो रही है और यूजर्स उनसे पूछ रहे हैं कि उन्हें पाकिस्तान के लिए इतना दर्द क्यों हो रहा है.
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भारत सरकार पर ही मदनी ने साधा निशाना
मौलाना मदनी ने पहलगाम में बेगुनाहों की हत्या को अमानवीय बताते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की. उन्होंने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में किसी भी निर्दोष की जान लेना गुनाह है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की “नफरत की पॉलिसी” के कारण भारत में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और लोगों को अपने ही देश को आग नहीं लगानी चाहिए.
पानी रोकने पर भी मदनी ने उठाए सवाल
इसके अलावा उन्होंने कश्मीर में पानी रोके जाने की खबरों पर भी टिप्पणी की और कहा कि नदियों को रोकना आसान नहीं है. कश्मीर में आतंकियों के घरों को गिराए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अगर आतंकवादी हैं तो कार्रवाई ठीक है, लेकिन निर्दोषों के घर नहीं गिराए जाने चाहिए. उन्होंने कश्मीर में भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद डेढ़ घंटे तक फायरिंग होने पर भी सरकार से जवाब मांगा.
हालांकि उनके इन बयानों के बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर उनकी चिंता लोगों को हजम नहीं हो रही है. सवाल यह उठ रहा है कि एक भारतीय मुस्लिम संगठन के प्रमुख को पड़ोसी देश की आर्थिक सेहत की इतनी फिक्र क्यों है. कई लोग इसे उनका भारत के प्रति कम प्रेम और पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति के तौर पर देख रहे हैं. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं. ऐसे में एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह का बयान गैरजरूरी विवाद पैदा कर सकता है. लोगों का मानना है कि मौलाना मदनी को अपने देश के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और ऐसे बयानों से बचना चाहिए जो अनावश्यक रूप से विवादों को जन्म दें.