लखीमपुर के किसानों ने शुरू की इस फसल की खेती, घर बैठे हो रही छप्परफाड़ कमाई
- April 29, 2025
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Last Updated:April 29, 2025, 07:09 IST Agriculture News: यूपी के लखीमपुर खीरी के किसान अब गन्ने की बजाय केले की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं, जिससे
Last Updated:April 29, 2025, 07:09 IST Agriculture News: यूपी के लखीमपुर खीरी के किसान अब गन्ने की बजाय केले की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं, जिससे
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हाइलाइट्स
लखीमपुर खीरी: यूपी के लखीमपुर जिले में किसान गन्ने की खेती कर लाखों रुपए कमाते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे जनपद में गन्ने का रकबा घटता जा रहा है. ऐसे में किसान अब बड़े स्तर पर केले की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. इस केले की खेती से किसान बंपर कमाई भी कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि केले की खेती में लागत कम मुनाफा अधिक है.
चीनी का कटोरा नाम से मशहूर है जिला
बता दें कि लखीमपुर खीरी जिले को चीनी का कटोरा कहा जाता है. इस जनपद में 9 चीनी मिल लगी हुई हैं. परंतु समय से चीनी मिल द्वारा पेमेंट न मिलने से किसानों को काफी दिक्कतें होने लगी. जिस कारण किसान अब पलिया क्षेत्र में केले की खेती पर अधिक जोर दे रहे हैं. किसान केले की खेती में कम लागत में तगड़ी कमाई करते हैं.
घर बैठे लाखों रुपए कमा रहे हैं किसान
लखीमपुर में किसान अब केले की खेती बड़े स्तर पर करने लगे हैं. केले की खेती कर किसानों को लाखों रुपए का मुनाफा आसानी से मिल जाता है. वहीं, केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनुदान भी देती है. साथ ही दूसरी फसलों की तुलना में केले की खेती से कम लागत में अधिक लाभ भी मिल रहा है.
खेत से ही हो जाती है बिक्री
वहीं, केले की खेती करने वाले किसान जगतार ने बताया कि इस समय हम 20 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं. जहां कम लागत में अधिक मुनाफा केले की खेती में कमा रहे हैं. केला 14 महीने में तैयार होने वाली फसल है. जबकि केले की सालभर मांग रहती है.यह एक ऐसा फल है, जो पूरे साल खाया जाता है. इस फसल की बिक्री खेत में ही आसानी से हो जाती है. इस समय मार्केट में केले का भाव 40 रुपए से लेकर 60 रुपए दर्जन है.
किसानों के लिए हो रही फायदेमंद
किसान ने बताया कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो रही है. इस विधि में कम खर्च में किसान मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. प्राकृतिक खेती लागत कम करने के साथ-साथ फसल उत्पादन बढ़ाने में भी सक्षम है. केले की खेती पूरे देश में की जाती है. जहां गर्म और सम जलवायु केला की खेती के लिए उत्तम होती है. प्राकृतिक खेती से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता और फसल की गुणवत्ता भी बढ़ाती है.
