यहां मौजूद है एशिया का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा गांव, जानिए क्या है इसका नाम
- May 10, 2025
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Last Updated:May 10, 2025, 10:34 IST भारत देश अपनी संस्कृति, खान-पान, कला और फिल्मों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि
Last Updated:May 10, 2025, 10:34 IST भारत देश अपनी संस्कृति, खान-पान, कला और फिल्मों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि
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अलीगढ़: भारत अपनी संस्कृति, खान-पान, कला और फिल्मों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साक्षरता के मामले में भी भारत किसी से पीछे नहीं है. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के जवां ब्लॉक में बसा धोर्रा माफी गांव पूरे एशिया में मशहूर है. दरअसल, यह गांव भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का सबसे पढ़ा-लिखा गांव है. अलीगढ़ के इस गांव के लोग खेती की बजाय नौकरी करते हैं. इसी लिए यहां हाई एजुकेटेड लोग रहते हैं.
गांव में करीब 90 फीसदी से ज्यादा लोग साक्षर
अलीगढ़ ज़िले के धोर्रा माफी गांव में करीब 10-12 हजार लोगों की आबादी है. गांव में करीब 90 फीसदी से ज्यादा लोग साक्षर हैं. इस गांव के करीब 80 फीसदी लोग देशभर में कई बड़े पदों पर तैनात हैं. गांव के कई लोग डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर और आईएएस अफसर बन चुके हैं. धोर्रा माफी गांव अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से सटा हुआ है. इसलिए, वहां के प्रोफेसर और डॉक्टर्स ने गांव में अपना घर बनाया. जिस वजह से यह एशिया का सबसे पढ़ा लिखा गांव कहलाने लगा.
गांव का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में है शामिल
अलीगढ़ के धोरा माफी नाम के इस गांव के स्थानीय निवासी आतिफ उर रहमान बताते हैं कि साल 2002 में धोर्रा माफी नाम के इस गांव का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में शामिल किया गया था. इस गांव का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए होने वाले सर्वे के लिए भी चुना गया था. धोर्रा माफी गांव में पक्के मकान, 24 घंटे बिजली-पानी और कई इंग्लिश मीडियम स्कूल व कॉलेज हैं. यहां के लोग खेती के बजाय नौकरी पर निर्भर हैं.
महिलाएं भी पुरुषों के समान ही हैं साक्षर
उन्होंने बताया कि शहर के धोर्रा माफी गांव के लोग काफी आत्मनिर्भर और शिक्षित हैं. साक्षरता के मामले में यहां की महिलाएं भी पुरुषों के समान ही हैं. इस गांव के डॉ. सिराज आईएएस अधिकारी हैं. इसके अलावा गांव के फैज मुस्तफा एक यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर रह चुके हैं. इसका बड़ा तबका विदेशों में भी रह रहा है. साक्षरता के मामले में यह गांव हमेशा चर्चा में रहता है. वहीं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर भी यही धोरा माफी में रहती हैं. फिलहाल, यह गांव पिछले 2023 के नगर निगम चुनाव में नगर निगम की सीमा में आ चुका है.
